यवतमाळ की तर्ज पर सरकार पूरे महाराष्ट्र के सभी मंदिरों को मद्य-मांस मुक्त करे! – मंदिर महासंघ

मुंबई/यवतमाळ – महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रयासों के बाद यवतमाळ जिले के रालेगांव में 100 वर्ष पुराने श्री शीतला माता मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटा दिए गए हैं और मंदिर परिसर मांस मुक्त हो गया है। इस मंदिर की दीवार से सटी मांस-मटन की दुकानों के कारण भक्तों को बहुत परेशानी हो रही थी, साथ ही मंदिर की पवित्रता भी भंग हो रही थी। स्थानीय प्रशासन की इस कार्रवाई से मंदिर संस्कृति को बल मिला है। महासंघ ने सरकार से मांग की है कि यवतमाळ की तर्ज पर पूरे महाराष्ट्र राज्य के सभी मंदिरों के परिसरों को मद्य-मांस मुक्त किया जाए और इसके लिए चल रहे राज्यव्यापी अभियान को और तेज करने का संकल्प लिया है।
🗒️ महाराष्ट्र के सभी मंदिरों को मद्य-मांस मुक्त किया जाए!
🙏 मंदिर महासंघ के विरोध के चलते रालेगांव (यवतमाळ) में मांस की दुकानें हटाई गईं!
🎙️ वक्ता: श्री. @SG_HJS , राष्ट्रीय संगठनक, मंदिर महासंघ#महाराष्ट्र #मद्य_मुक्त #मांस_मुक्त #MaharashtraPolitics pic.twitter.com/KDrSp61PNF
— Mandir Mahasangh (@mandirmahasangh) September 1, 2025

मंदिर केवल इमारतें नहीं, बल्कि चैतन्य और सात्त्विकता के केंद्र हैं। महाराष्ट्र संतों की भूमि है और मंदिर श्रद्धा के स्थान हैं। मंदिर परिसर में मद्य, मांस और मटन की दुकानों के कारण मंदिर क्षेत्र की पवित्रता भंग होती है और भक्तों को भी भारी मानसिक पीड़ा सहनी पड़ती है। दुर्भाग्य से केवल यवतमाळ ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में कई मंदिरों के परिसरों में मांस, मटन और शराब की दुकानें खुल गई हैं। इस समस्या की गंभीरता को पहचानते हुए महासंघ ने राज्य के प्रत्येक जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई शुरू करने की जोरदार मांग की है।

मंदिर महासंघ की ओर से पहले आयोजित राज्यव्यापी मंदिर अधिवेशनों में ‘मंदिरों और तीर्थस्थलों के परिसरों को मद्य-मांस मुक्त करें’, जैसे प्रस्ताव पारित कर सरकार को सौंपे गए हैं। सरकार को इन्हें तत्काल लागू करना चाहिए। महासंघ की ओर से यह स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन समय पर कदम नहीं उठाता है, तो महासंघ अपने अभियान को राज्य भर में और तेज करेगा। इस संदर्भ में, यह भी अपील की जा रही है कि जिन भक्तों को अपने क्षेत्र के मंदिरों के पास ऐसी समस्याएं महसूस होती हैं, या जो इस ‘मंदिर मद्य मांस मुक्त अभियान’ में शामिल होना चाहते हैं, वे महाराष्ट्र मंदिर महासंघ से संपर्क करें।








