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मंदिर सनातन धर्म प्रचार के केंद्र बनें – श्रीकांत पिसोळकर, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ

श्री चंडिकादेवी संस्थान, कुरणखेड में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की बैठक में आवाहन

बाईं ओर से श्री. प्रमोद अग्निहोत्री, अधिवक्ता मुकुंद जालनेकर, श्री. अरविंद देठे, श्री. प्रशांत देशमुख, श्री. श्रीकांत पिसोळकर और श्री. अमोल वानखडे ।

अकोला – राज्य के मंदिरों के सरकारीकरण के कारण कई मंदिरों से प्राचीन धार्मिक परंपराओं का लोप हो रहा है, मंदिरों की संपत्ति का गबन हो रहा है, देवस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं । प्रजा को सनातन धर्म की शिक्षा न मिलने के कारण इसके दुष्परिणाम हर जगह दिख रहे हैं ।

इसी कारण, यदि हिन्दुओं के मंदिरों से यह शिक्षा दी जाए, तो धार्मिक प्रवृत्ति के लोग मंदिर प्रबंधन को आदर्श तरीके से देख सकेंगे । मंदिर सनातन धर्म प्रचार के केंद्र बनें, ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और हिन्दू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्री. श्रीकांत पिसोळकर ने जिले के सुप्रसिद्ध श्री चंडिकादेवी संस्थान में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, अकोला की ओर से आयोजित मंदिर ट्रस्टियों की बैठक में किया ।

इस कार्यक्रम में ३०० से अधिक मंदिरों के ट्रस्टी उपस्थित थे । कार्यक्रम का आरंभ श्री चंडिकादेवी को पुष्पमाला अर्पित कर किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत में, हर साल मंदिर में २५० से ३५० बच्चों के लिए १ महीने का आवासीय बालसंस्कार शिविर आयोजित करने वाले ह.भ.प. गोपाल महाराज देवरे का मंदिर के अध्यक्ष श्री. प्रशांत देशमुख के हाथों शाल और श्रीफल देकर सत्कार किया गया ।

इस अवसर पर अधिवक्ता मुकुंद जालनेकर और श्री. प्रमोद अग्निहोत्री ने भी भाषण दिए । सर्वश्री सुभाष देशमुख, दिनकर ठाकरे, कंझरकर और अन्य मंदिर ट्रस्टियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।

मंदिरे के संबंध में अप्रिय घटनाएं हो रही हैं; क्योंकि हिन्दू संगठित नहीं हैं । ‘मंदिर ट्रस्टी’ के नाते यदि मंदिर में सप्ताह में एक दिन सामूहिक आरती का आयोजन किया जाए, और गांव के प्रत्येक परिवार को मंदिर के गर्भगृह में जाकर आरती करने का अवसर दिया जाए, तो गांव के श्रद्धालुओं का अच्छा संगठन हो सकता है ।

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