
जम्मू (जम्मू-कश्मीर) – ‘यूथ फॉर पनून कश्मीर’ के माध्यम से आयोजित राष्ट्रीय स्तर का ‘काश्मीरी हिन्दू अधिवेशन’ १३ जुलाई को सम्पन्न हुआ । इस ऐतिहासिक एक दिवसीय अधिवेशन का समापन सर्वसम्मति से स्वीकृत ‘जम्मू घोषणापत्र’ द्वारा हुआ । इसमें ‘पनून कश्मीर’ नामक केन्द्रशासित प्रदेश की स्थापना की अंतिम तिथि १९ जनवरी २०२६ निश्चित की गई है तथा भारत सरकार से इस हेतु निर्णायक कदम उठाने की मांग की गई है । ‘पनून कश्मीर’ की स्थापना को हिन्दू राष्ट्र की दिशा में प्रथम चरण माना गया, ऐसा ठोस विश्वास भी इस अवसर पर व्यक्त किया गया । वर्ष २०१९ में अनुच्छेद ३७० के हटाए जाने के पश्चात काश्मीरी हिन्दुओं का यह प्रथम अधिवेशन था।
१. अधिवेशन में सम्पूर्ण भारत से संत, विधिज्ञ, विद्वान, युवा नेता तथा विविध सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए । इन्होंने काश्मीरी हिन्दू समाज के न्यायसंगत पुनर्स्थापन, सम्मान तथा सांस्कृतिक अधिकारों हेतु एक स्वर में आवाज उठाई ।
२. कार्यक्रम का प्रारम्भ दीपप्रज्वलन तथा भव्य स्वागत समारोह से हुआ ।
३. अधिवेशन में १३ जुलाई १९३१ के दिन काश्मीरी हिन्दू नरसंहार में हुतात्मा हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।
🚨 A Wake-up Call from Kashmiri Hindu Leaders !
At the historic Kashmiri Hindu National Convention organized by @Y4PK_Homeland, 400+ pro-Hindu groups demanded:
👉 Promulgate a new Union Territory "Panun Kashmir" before January 19, 2026!
“This is not just about Kashmir. If… pic.twitter.com/jTHuCyKvTB
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 13, 2025
Inform your friends and relatives at Jammu to join the Adhiveshan today 9.30am Abhinav theater
Jai Panun Kashmir🚩🚩 pic.twitter.com/n1HN7Dhh9P
— DrCharudatta pingale (@hjsdrpingale) July 13, 2025
४०० हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के शक्तिशाली संगठन द्वारा ‘एक भारत अभियान २’ का शुभारम्भ !
‘यूथ फॉर पनून कश्मीर’ ने घोषणा की कि ‘एक भारत अभियान २’ नामक ऐतिहासिक सांस्कृतिक आंदोलन का आज से शुभारम्भ हो रहा है । इसमें भारत के ४०० से अधिक हिन्दू संगठन, युवा संगठन तथा आध्यात्मिक सम्प्रदाय सम्मिलित हैं । यह अभियान भारत के प्रत्येक ग्राम, जनपद तथा राज्य की राजधानी तक पहुंचेगा और काश्मीरी हिन्दुओं के लिए एक स्वतंत्र मातृभूमि एवं धर्म की पुनर्स्थापना हेतु एक सशक्त संयुक्त शक्ति का निर्माण करेगा ।
अधिवेशन में निम्नलिखित मान्यवर उपस्थित थे !
डॉ. अग्नीशेखर, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे, अधिवक्ता (पूज्य) रविन्द्र घोष, स्वामी कुमारजी, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, डॉ. कोनराड एल्स्ट, श्री रणजीत सावरकर, अर्जुन सम्पत, प्रमोद मुतालिक, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे, राहुल कौल, अरुण गुप्ता, राजेश गुप्ता, श्री गंगाधर कुलकर्णी, पुन्नू स्वामी, अश्विनी भट्ट, कुंदन काश्मीरी, मोतीलाल मल्ला, राजीव पंडिता, शमा रैना, आर. के. वांगणू, डॉ. सुशील वत्तल, रोहित रवि भट्ट तथा दिगम्बर रैना ।
‘पनून कश्मीर’ कोई राजनैतिक सौदेबाजी नहीं, अपितु एक न्यायोचित तथा सांस्कृतिक आदेश !
डॉ. अग्नीशेखर, श्री रणजीत सावरकर तथा अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दृढतापूर्वक कहा कि ‘पनून कश्मीर’ कोई राजनैतिक सौदा नहीं, अपितु भारत को धर्म तथा न्याय की रक्षा हेतु पूर्ण करने योग्य सांस्कृतिक आदेश है ।
‘पनून कश्मीर : हिन्दू राष्ट्र की नींव’ विषय पर परिसंवाद !
‘पनून कश्मीर : हिन्दू राष्ट्र की नींव’ इस विषय पर ‘यूथ फॉर पनून कश्मीर’ के श्री विठ्ठल चौधरी की अध्यक्षता में परिसंवाद सम्पन्न हुआ । इसमें श्री प्रमोद मुतालिक, रमेश शिंदे, अर्जुन सम्पत, राहुल कौल तथा डॉ. राजसिंह शेखावत सहभागी रहे ।
‘हिन्दू संस्कृति : संघर्ष एवं समाधान’ इस विषय पर हुए परिसंवाद में डॉ. कोनराड एल्स्ट तथा सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळे ने भाग लिया । अध्यक्षता आशिष धर ने की ।
‘जम्मू की प्रादेशिक समस्या तथा मातृभूमि का समन्वय’ विषय पर भी एक परिसंवाद आयोजित किया गया था ।
जम्मू घोषणापत्र’ की मुख्य मांगें
१. काश्मीरी हिन्दू नरसंहार को विधिक तथा संवैधानिक मान्यता प्राप्त हो ।
२. ‘पनून कश्मीर’ नामक केन्द्रशासित प्रदेश की शीघ्र स्थापना हो ।
३. पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान में पीडित हिन्दुओं को पूर्ण सुरक्षा एवं सहायता प्रदान की जाए ।
इन मांगों की पूर्ति न होने की स्थिति में राष्ट्रवादी शक्तियां जम्मू में एकत्र होंगी और यह राष्ट्र की पुनःप्राप्ति की अंतिम प्रक्रिया का प्रारम्भ सिद्ध होगा, ऐसा घोषणापत्र में स्पष्टतः कहा गया ।
अधिवेशन से प्रकट हुए तेजस्वी विचार
१. इस्लामी आतंकवाद के प्रथम शिकार बने काश्मीरी हिन्दुओं को न्याय दिलाना ही भविष्य के हिन्दू राष्ट्र की आधारशिला होगा ।
२. कश्मीर घाटी के वर्तमान भौगोलिक क्षेत्र से पृथक होकर ‘पनून कश्मीर’ को एक स्वतंत्र केन्द्रशासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाए — यह हमारी स्पष्ट मांग है । हिन्दू राष्ट्र निर्भीकता से, दृढता एवं अपरिवर्तनीय स्वरूप में प्रकट होना चाहिए ।
३. जम्मू ने दशकों से अन्याय तथा राजनैतिक दमन सहन किया है एवं वहां की हिन्दू जनसंख्या में निरन्तर गिरावट हो रही है । अतः हम मांग करते हैं कि जम्मू को एक स्वतंत्र पहचान, अधिकार एवं वहां हो रहे विकास के लिए संविधान द्वारा वैधानिक तथा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त हो ।








