2012 की आजाद मैदान हिंसा की पुनरावृत्ति न हो ! – हिन्दू संगठनों की शासन से मांग

मुंबई : वर्ष 2012 में म्यांमार में मुसलमानों पर कथित अत्याचार के विरोध में आजाद मैदान, मुंबई में निकाला गया मोर्चा हिंसक दंगे में बदल गया था। इसमें ‘अमर जवान ज्योति’ की अपमानजनक घटना, पुलिस व मीडिया की गाड़ियों को जलाया गया, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और महिला पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए थे। अब उसी पृष्ठभूमि पर 18 जून 2025 को आजाद मैदान में आयोजित ‘गाजा-फिलिस्तीन समर्थन’ मार्च पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति ने की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) श्री सत्यनारायण चौधरी को निवेदन सौंपा गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि “हमें इसकी जानकारी है और हम उचित कार्रवाई करेंगे।”

यह निवेदन प्रस्तुत करते समय उपस्थित थे, हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के संयोजक श्री सुभाष अहीर, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के श्री विलास निकम, अधिवक्ता सुरभि सावंत व प्रथमेश गायकवाड (मुंबई उच्च न्यायालय), बजरंग दल के श्री उदयभान तिवारी, विधिक सलाहकार कु. सानिया शेवाले, मानव सेवा प्रतिष्ठान के श्री सिद्धार्थ पाटील, भाजपा मलबार हिल मंडल महामंत्री श्री संतोष पालेकर तथा हिन्दू जनजागृति समिति के मुंबई समन्वयक श्री बळवंत पाठक, श्री रविंद्र दासरी, श्री मधुसूदन आले और श्री सतीश सोनार।
यह मार्च अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ट्विटर हैंडल से घोषित हुआ है और इसे वामपंथी संगठनों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह मोर्चा भारत के विदेश नीति के विरुद्ध, और इजरायल जैसे मित्र राष्ट्र के विरोध में है। मार्च के समर्थक आतंकवादी संगठन हमास की हिंसा की आलोचना नहीं करते, बल्कि भारत में मुस्लिम समाज को भड़काने का प्रयास करते हैं, यह समिति ने आरोप लगाया।
हिन्दू संगठनों का कहना है कि इससे मुंबई में पुनः धार्मिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। कश्मीरी हिन्दुओं का विस्थापन, बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले या भारत पर हुए आतंकी हमलों पर ये कार्यकर्ता कभी सड़कों पर नहीं उतरे, इस ओर समिति ने ध्यान आकर्षित किया है। यह आंदोलन न केवल पक्षपाती है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करनेवाला है। इसलिए इस पर अविलंब प्रतिबंध लगे और आयोजकों पर सख्त कार्रवाई हो, यह समिति की स्पष्ट मांग है। मुंबई की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है।








