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अकोला में ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ की स्थापना !

हिन्दू कार्यकर्ताओं को कानूनीदृष्टि से प्रशिक्षित करने हेतु विदर्भ के अधिवक्ताओं का एकमुख से निर्धार !

राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति हिन्दू कार्यकर्ताओं को कानूनी दृष्टि से प्रशिक्षित करेगी – पू. (अधिवक्ता) सुरेश कुलकर्णी

बोधचिन्ह का अनावरण करते हुए बाएं से अधिवक्ता उदय आपटे, पू. अशोक पात्रीकर,पू. (अधिवक्ता) सुरेश कुलकर्णी, श्री. सुनील घनवट

अकोला (महाराष्ट्र) – ब्रिटिशों ने उनके लिए हितकारी प्रचलित व्यवस्था भारतीयों पर लादी; जिसका हम आज भी अनुकरण कर रहे हैं । इसलिए हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं पर नाहक अन्याय हो रहा है । मूलत: न्याय समतोल होना चाहिए । हमें अपनी संस्कृतिनुसार विकसित और अपने आदर्शों का विचार कर न्याय देनेवाली न्यायव्यवस्था चाहिए । हिन्दुत्वनिष्ठों पर हो रहे अन्याय दूर करने के लिए ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ हिन्दू कार्यकर्ताओं को कानूनी दृष्टि से प्रशिक्षित करनेवाली है । उसके लिए सभी अधिवक्ताओं को इस कार्य में समर्पितभाव से सम्मिलित होना आवश्यक है, ऐसा मार्गदर्शन मुंबई उच्च न्यायालय के पू. (अधिवक्ता) सुरेश कुलकर्णी ने किया । आदर्श राष्ट्ररचना के लिए कार्यरत ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’की स्थापना ३१ मार्च को की गई । इस समिति का पहला ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता अधिवेशन’ (विदर्भ प्रांत) अकोला में आयोजित किया गया है । इस अधिवेशन में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक पू. अशोक पात्रीकर की वंदनीय उपस्थिति थी ।

अधिवेशन का प्रारंभ दीपप्रज्वलन से हुआ । वेदमूर्ति सचिन तक्रस ने वेदमंत्रपठन किया । प्रस्तावना अधिवक्त्या (श्रीमती) श्रुती भट और सूत्रसंचालन श्रीमती आनंदी वानखडे ने किया । अधिवेशन के लिए अकोला, अमरावती, चंद्रपुर, खामगांव, तेल्हारा, आकोट, मलकापुर, वाडेगांव, नांदुरा, बाळापुर और पातुर से ८० से भी अधिक अधिवक्ता सम्मिलित हुए थे ।

कालानुसार अधिवक्ताओं को राष्ट्र-धर्म कार्य में सक्रिय होना चाहिए ! – सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति

मुठ्ठीभर मावळों ने हिंदवी स्वराज्य स्थापित किया । महाभारत में कौरवों के पक्ष में भारी सेना होते हुए भी धर्म के पक्ष में लडनेवाले पांडव ही अंत में विजयी हुए । उस अनुसार ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ यह ऐसे अधिवक्ताओं का संगठन है जो धर्म के पक्ष में हैं । सभी को राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए सक्रिय होकर साधक अधिवक्ता के रूप में तैयार होने की आवश्यकता है ।

अधिवक्ताओं को न्यायालयीन कुशलता का उपयोग राष्ट्र-धर्म कार्य के लिए करना चाहिए ! – अधिवक्ता मुकुंद जालनेकर

हिन्दू राष्ट्र स्थापना का विचार और धर्मकार्य में रुचि रखनेवाले अधिवक्ताओं को धर्मकार्य से जोडना, धर्मसंस्थापना के कार्य में प्रत्यक्ष सम्मिलित करना और उनका संगठन तैयार करना, इसके लिए राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति कार्यरत रहेगी । राष्ट्र और मनुष्यजीवन का ध्येय साध्य करने के लिए साधना करना आवश्यक है । यह ध्यान में रखकर उन्हें यह समिति साधना के विषय में मार्गदर्शन भी करेगी । उसके लिए अधिवक्ता अधिवेशन का आयोजन करना, सुराज्य अभियान के माध्यम से सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों के विरोध में कार्य करना, इसके साथ ही हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं को कानून के विषय में मार्गदर्शन करना आदि कार्य यह समिति करनेवाली है । इसलिए सभी इस कार्य में सम्मिलित होकर राष्ट्र और धर्म के कार्य के लिए अपना कौशल्य अर्पण करें ।

हिन्दूद्वेषमूलक वक्तव्यों के विरोध में संगठितरूप से प्रयत्न करेंगे ! – अधिवक्ता उदय आपटे, खामगांव

हिन्दू धर्मविरोधी वक्तव्य करने की बारंबारता अल्प होने के स्थान पर बढती ही जा रही है । उसे प्रतिबंध लगाने के लिए उपाययोजना की आवश्यकता है । ‘संघेशक्ति कलौयुगे ।’ यह युक्ति ध्यान में रखकर सभी हिन्दूविरोधी वक्तव्य करनेवालों के विरुद्ध संगठित होना आवश्यक है । हिन्दू धर्म विरुद्ध द्वेषमूलक वक्तव्य हुए, तो प्रचलित कानूनद्वारा वह अपराध है । इसलिए हम उसका परिवाद कर सकते हैं । हमारे द्वेषमूलक वक्तव्य के विरोध में कठोर कानूनी कार्रवाई करने पर यह बात निश्चितरूप से थम जाएगी ।

हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ताओं का राष्ट्र और धर्म कार्य में सहभाग महत्त्वपूर्ण ! – श्रीकांत पिसोळकर, विदर्भ समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति

कानून के जानकार के रूप में हिन्दुत्व का कार्य करते हुए हमें अधिवक्ताओं के सहयोगी की बहुत आवश्यकता है । वर्तामान में राजकीय स्वार्थ के लिए कानून बनाया जा रहा है और उसे रहित भी किया जा रहा है । हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं पर पुलिस यंत्रणा अन्याय कर रही है । इसलिए न्यायालयीन सहायता के लिए अधिवक्तताओं को राष्ट्र और धर्म के कार्य में सम्मिलित होना आवश्यक है ।

क्षणिकाएं

१. अधिवेशन में ‘हिन्दूविरोधियों का राष्ट्र और धर्मविरोधी कार्रवाईयां और अधिवक्ताओं के कर्तव्य’ इस विषय में परिसंवाद लिया गया । उसमें श्री. सुनील घनवट, अधिवक्ता पप्पू मोरवाल, अधिवक्ता धीरज जयस्वाल, अधिवक्ता योगेश पाटील और अधिवक्त्या (श्रीमती) ममता तिवारी ने सहभाग लिया ।

२. इस अवसर पर अधिवक्त्या श्रीमती सुनीता कपिले, अधिवक्ता शरद इंगळे के साथ अन्य अधिवक्ताओं ने उत्स्फूर्तता से न्यायालय में कार्य करते समय आए अनुभव बताए ।

३. ‘हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में अधिवक्ताओं का कार्य के रूप में सहभाग’ इस विषय में निरंजन चौधरी ने संबोधित किया । ‘सूचना अधिकार कानून द्वारा राष्ट्र और धर्म की रक्षा का कार्य’ इस विषय पर अधिवक्ता (श्रीमती) प्राजक्ता जामोदे ने संबोधित किया ।


राष्ट्रभक्त अधिवक्ताओं को हिन्दू राष्ट्र स्थापना का लक्ष्य रखकर कार्य करना चाहिए !

‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’की स्थापनानिमित्त संदेश

‘स्वतंत्रतासंग्राम के काल को यदि देखें, तो गणेश वासुदेव जोशी, लोकमान्य टिळक, न्यायमूर्ति रानडे, वीर सावरकर, देशबंधु चित्तरंजन दास जैसे अधिवक्ताओं के नाम सामने आते हैं । यह सूची लंबी होगी; परंतु महत्त्वपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्रतासंग्राम में अधिवक्ताओं की सेना स्वतंत्रतासेनानी के रूप में जैसे उतरी, उसी प्रकार आज भी राष्ट्रभक्त अधिवक्ताओं को हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य में उतरना, उनकी समष्टि साधना है । राष्ट्रभक्त अधिवक्ताओं के लिए व्यष्टि साधना करने के साथ ही इस राष्ट्रकार्य में योगदान देकर समष्टि साधना करना महत्वपूर्ण है । इस कार्य से उनकी आध्यात्मिक प्रगति शीघ्र गति से होगी ।

संकट के प्रसंग में देश में विविध स्थानों पर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए कार्यरत हिन्दुत्वनिष्ठों की सहायता के लिए खडे रहेंगे, उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन करनेवाले, इसके साथ ही हिन्दू राष्ट्र का विरोध करनेवाले कानूनी पद्धति से उत्तर देनेवाले अनेक राष्ट्रभक्त अधिवक्ता देशभर में संगठित होने आवश्यक हैं । अधिवक्ताओं को हिन्दू राष्ट्र स्थापना का लक्ष्य रखकर कार्य करना चाहिए । इससे यह कार्य गति से होने में सहायता होेगी !’

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