अमरावती में पत्रकार परिषद
तहसीलदारों पर कार्रवाई करने की और गैरकानूनी प्रकरण निबटाने के लिए महाराष्ट्र में ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’की मांग !

अमरावती – श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान, अमरावती, ता.जि. अमरावती धार्मिक संस्थान की कृषिभूमि हडपने के उद्देश्य से सुमन कोठार ने तहसीलदार के समक्ष उसे खरीदने की अर्ज की थी । तहसीलदार विजय सुखदेव लोखंडे ने कानून का उल्लंघन करते हुए संस्थान के प्राथमिक आक्षेप अर्ज पर निर्णय न लेते हुए संस्थान की लगभग ५० करोड रुपयों की भूमि ९६० रुपयों में देने का गैरकानूनी आदेश २६ सितंबर २०२४ को दिया । संपूर्ण प्रकरण की सखोल पूछताछ न करते हुए निर्णय देनेवाले इन अधिकारियों पर कार्रवाई हो । ऐसे दोषी अधिकारियों को दंड होने के लिए ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’की आवश्यकता है, ऐसा मत मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने व्यक्त किया । वे यहां हुई पत्रकार परिषद में बोल रहे थे । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्री. श्रीकांत पिसोळकर, राज्य कोर कमिटी के पदाधिकारी श्री. अनुप जयस्वाल, जिला संयोजक श्री. कैलाश पनपालिया, श्री. विनीत पाखोडे, आशिष मारूडकर, मंदिर विश्वस्त गजानन जवंजाळ, हिन्दू जनजागृति समिति के जिला समन्वयक श्री. नीलेश टवलारे उपस्थित थे ।
श्री. सुनील घनवट बोले,…
१. गैरकानूनी आदेश पारित करने के अगले दिन खरीदी की प्रविष्टी की गई । तहसीलदार ने संस्थान की कृषिभूमि के प्रकरण में अनियमितता कर गैरकानूनी हस्तांतरण का प्रयत्न किया । इससे संस्थान एवं भक्तगणों के साथ विश्वासघात हुआ है । उन्होंने पद का दुरुपयोग कर कानून का उल्लंघन किया । मंदिर महासंघ की ओर से इस प्रकरण में परिवाद किया गया ।
२. महानगरपालिका के अंतर्गत होने से कानून की धारा ६० के अनुसार इस भूमि पर कुल कानून लागू नहीं होता ।
३. श्री सोमेश्वर संस्थान, अमरावती पर कानून के अनुसार छूट प्रमाणपत्र प्राप्त होने से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयनुसार छूट प्रमाणपत्र प्राप्त ट्रस्ट को कुल कानून लागू नहीं होता ।
तहसीलदार का आदेश निरस्त कर कृषिभूमि के ७/१२ उतारे में संस्थान का नाम पूर्ववत् करने के विषय में, इसके साथ ही तहसीलदारों द्वारा मंदिर प्रकरण में अनियमितता करने से उन पर दायित्व निश्चित कर कार्रवाई करने के लिए मंदिर महासंघ की ओर से तक्रार अर्ज विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी एवं उपविभागीय अधिकारी, अमरावती को प्रस्तुत किया गया है । इसकी जानकारी मंदिर महासंघ के महाराष्ट्र पदाधिकारी श्री. अनुप जयस्वाल ने पत्रकार परिषद में दी ।








