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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, फैजाबाद, गाजियाबाद आदि जिलों के नामों में भी बदलाव किए जाएं !

  • हिन्दुत्वनिष्ठोंद्वारा पत्रकार परिषद के माध्यम से मांग

  • पत्रकार परिषद में हिन्दू जनजागृति समिति का सहभाग

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के एक नगर इलाहाबाद का नाम बदलकर उसे प्रयागराज, यह प्राचीन नाम देने की घोषणा की है। हम इसका समर्थन एवं अभिनंदन करते हैं ! यहां हिन्दुत्वनिष्ठोंद्वारा आयोजित पत्रकार परिषद में यह मांग की गई कि भारत पर आक्रमण करनेवाले मुघल और ब्रिटीशोंद्वारा दिए गए देश के विविध प्रदेशों के नाम बदले जाएं !

इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने पत्रकार परिषद को संबोधित किया। इस समय उनके साथ विश्‍व हिन्दू परिषद के विभागाध्यक्ष श्री. ललित माहेश्‍वरी, श्री. अरुण पंवार, अधिवक्ता श्री. विकास वर्मा, श्री. दयानंद आचार्य, श्री. विकास अगरवाल, श्री. पवन सिंघल, साथ ही राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन के राष्ट्रीय संयोजक श्री. संजय अरोरा उपस्थित थे।

श्री. रमेश शिंदे ने कहा, वास्तव में भारत को स्वतंत्रता मिलते ही इन नामों को बदल दिया जाना चाहिए था; परंतु मतों के लालच में एवं कथित निधर्मी सरकारों ने इसकी उपेक्षा की ! जर्मनी एवं इस्राईल इन देशों में वहां के किसी भी नगर अथवा गांव को आक्रमकों के नाम दिए गए हों, ऐसा कहींपर भी दिखाई नहीं देता ! ऐसे समय में योगी आदित्यनाथजी द्वारा किया गया यह निर्णय प्रशंसनीय है। अब वे इसके आगे जाकर मुजफ्फरनगर, फैजाबाद, गाजियाबाद आदि नगरों के नाम भी बदल दें !

राममंदिर का निर्माण बिनाविलंब हो !

श्री. रमेश शिंदे ने आगे कहा, पिछले मास में देहली में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से उत्तर भारत के हिन्दू संगठनों के लिए एक अधिवेशन का आयोजन किया गया था। उसमें इन संगठनों ने अपनी मांगों के प्रस्ताव पारित कर उन्हें केंद्र सरकार को भेज दिया था। उसमें राममंदिर निर्माण का भी सूत्र था। साथ ही कश्मीर में हिन्दुआें का पुनर्वास एवं भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना आदि मांगें भी थीं ! अब सरकार को हिन्दुआें की मांगों की उपेक्षा न कर बिना किसी विलंब से राममंदिर का निर्माण करना चाहिए।

उन्होंने आगे ऐसा भी कहा कि, भारत के विभाजन के पश्‍चात मुसलमानों को जब स्वतंत्र राष्ट्र दिया गया, उसी समय भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था। तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल में भारतीय संविधान में ‘सेक्युलर’ एवं ‘सोशलिस्ट’ इन शब्दों को घुसेड़ दिया। संविधान से इन शब्दों को हटा देना चाहिए !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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