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उत्तराखंडमें देवभूमि रक्षा अभियान कार्यान्वित !

उत्तराखंडमें महाप्रलयके पश्चात सैकडों मार्ग तथा सेतु बह गए हैं; इसलिए राज्यके नागरिकोंको परिवहनकी अडचनें आ रही हैं । परिणामस्वरूप वैद्यकीय सुविधाओंका अभाव है ।…

परबा गांवमें समितिके कार्यक्रममें तीन सौसे अधिक ग्रामवासियोंकी उत्स्फूर्त उपस्थिति

ओडिशा तथा झारखंड राज्यकी सीमापर अतिशय दुर्गम क्षेत्रमें परबा नामक गांवमें ‘हिंदू धर्मकी सद्य:स्थिति तथा हिंदू संगठनकी आवश्यकता’ इस विषयपर आयोजित किए गए कार्यक्रममें गांवके…

भारतका विनाश टालनेके लिए भारतको ’हिंदू राष्ट्र’ के रूपमें घोषित करना चाहिए !

बेंगळुरूमें हिंदू जनजागृति समितिके राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेने ’हिंदू राष्ट्र’ की आवश्यकता’ इस विषयपर हिंदूनिष्ठ संगठनोंके प्रमुख व्यक्तियोंका मार्गदर्शन किया ।

श्री श्री रविशंकरजीद्वारा हिंदू जनजागृति समितिको आशीर्वाद !

हिंदू जनजागृति समितिके अमूल्य कार्यको मेरे संपूर्ण आशीर्वाद हैं, आशीर्वादके ये शब्द ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्थाके संस्थापक श्री श्री रविशंकरजी द्वारा कहे गए । इफ्तार…

एक राज्यमें प्रसार हेतु जानेवाले समितिके कार्यकर्ताओंकी जानकारी प्राप्त करने हेतु पुलिस द्वार

पुलिसने उस राज्यकी समितिकी एक कार्यकत्रीकी पूछताछ कर उससे इस कार्यकर्ताके विषयमें जानकारी प्राप्त करनेका प्रयास किया ।

हिंदू जनजागृति समितिके पदाधिकारियोंकी श्री श्री रविशंकरजीके साथ कृतज्ञता भेंट

श्री श्री रविशंकरने बताया, धर्मांतरित होनेवाले हिंदुओं तक हमारे धर्मकी महानता पहुंचनी चाहिए तथा उन्हें श्रीकृष्णका तत्त्वज्ञान सिखाना चाहिए ।

इंडोनेशियामें आजसे वैश्विक हिंदू परिषदका आरंभ !

इंडोनेशियाके वैश्विक हिंदू परिषदकी कार्यकारिणी समितिने वैश्विक हिंदू परिषदका आयोजन किया है ।१३ से १७ जून २०१३ की कालावधिमें होनेवाली वैश्विक हिंदू परिषदके लिए हिंदू…

शास्त्रको छोडकर हिंदू और धर्म ये दो शब्द रह ही नहीं सकते ! – डॉ. कौशिकचंद्र मलिक

शास्त्रको छोडकर हिंदू और धर्म ये दो शब्द रह ही नहीं सकते । हिंदू धर्म शास्त्रपर आधारित है । वेद अपौरूषेय हैं ।

शौर्यको प्रोत्साहन देनेवाले उपक्रम कीर्तनकारोंको करने चाहिए ! – ह.भ.प. चारुदत्त आफळे

कीर्तनकार एवं प्रवचनकारोंको केवल कीर्तन ही करके नहीं रुकना चाहिए, अपितु प्रसंगानुरूप शौर्यको प्रोत्साहन देनेवाले उपक्रम भी चलाने चाहिए ।

द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन’की फलनिष्पत्ती

हिंदू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए किए जानेवाले प्रयत्नोंके लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चरणके रूपमें इस अधिवेशनका इतिहासमें उल्लेख होगा ! इस अधिवेशनका उद्देश्य १०० प्रतिशत सफल हुआ…