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ये एक गेहूं का दाना है पांडवों की निशानी, वजन करीब १५० ग्राम

श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११६

                                                                                 प्राचीन गेहूं का दाना
 

उज्जैन (मध्यप्रदेश) – महाभारत के काल का इतिहास करीब ५००० हजार साल पुराना हो चुका है। उस समय द्वापर युग चल रहा था और अब कलियुग चल रहा है। पांडवों के बाद से ही कलियुग प्रारंभ हो गया था। उस काल से जुड़ी कई निशानियां अलग-अलग शोधों में देश के कई हिस्सों में मिली हैं। जब पांडवों का अज्ञातवास चल रहा था, तब वे शिमला क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) में करसोग घाटी के ममेल गांव में ठहरे थे। ऐसा माना जाता है कि उस काल का एक गेहूं का दाना आज भी यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर में रखा हुआ है। इस गेहूं के दाने का वजन करीब १५० ग्राम है।

यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार इसी मंदिर में पांच पांडवों के पांच शिवलिंग भी स्थापित हैं। इन पांचों शिवलिंगों का पूजन करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से एक लोटा जल भी इन शिवलिंगों पर अर्पित करता है तो उसे शिवजी की कृपा प्राप्त होती है और दुखों से मुक्ति मिलती है। इस क्षेत्र में एक प्राचीन ढोल भी है। इस ढोल के संबंध में ऐसा माना जाता है कि यह भीम का ढोल का है।

              इस ढोल के संबंध में ऐसा माना जाता है कि यह भीम का ढोल का है।

 

  पांच पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर

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