Menu Close

तानाशाह होता तो पहली कक्षा से गीता पढ़ाता : जस्टिस दवे

श्रावण शुक्ल पक्ष सप्तमी, कलियुग वर्ष ५११६

300

नई देहली : सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एआर दवे ने कहा है कि भारतीयों को प्राचीन परंपराओं की ओर लौटना चाहिए और महाभारत और गीता जैसी किताबें बचपन से ही पढ़ाई जानी चाहिए।

जस्टिस दवे ने कहा, 'गुरु-शिष्य परंपरा जैसी हमारी प्राचीन परंपराएं खत्म हो गई हैं। अगर वे होतीं तो हमें ये सारी समस्याएं न झेलनी पड़तीं।' समस्याओं से उनका मतलब हिंसा और आतंकवाद से था। जस्टिस दवे एक सम्मेलन में बोल रहे थे जिसका विषय था – ग्लोबलाइजेशन के दौर में मानवाधिकारों के समक्ष चुनौतियां।

जस्टिस दवे ने कहा, 'अब हम कई देशों में आतंकवाद देख रहे हैं। ज्यादातर देश लोकतांत्रिक हैं। अगर लोकतांत्रिक देश में हर कोई अच्छा है तब तो कुदरती तौर पर वे किसी ऐसे व्यक्ति को चुनेंगे जो अच्छा हो। और ऐसा व्यक्ति तो किसी और को नुकसान पहुंचाने की सोचेगा भी नहीं।'

उन्होंने कहा कि सभी की अच्छाई को बाहर लाकर हम हर जगह हिंसा रोक सकते हैं और उसके लिए हमें अपनी जड़ों की ओर वापस जाना होगा।

यह सम्मेलन गुजरात लॉ सोसाइटी ने आयोजित किया था। जस्टिस दवे ने पहली क्लास से ही बच्चों को भगवद्गीता और महाभारत पढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कहा, 'जो बहुत ज्यादा धर्मनिरपेक्ष है या तथाकथित सेक्युलर है वह सहमत नहीं होगा। मैं अगर भारत का तानाशाह होता तो मैं गीता और महाभारत को पहली क्लास से ही पढ़ाता। जिंदगी जीने का तरीका आप ऐसे ही सीखते हैं। माफ करना, अगर कोई कहे कि मैं सेक्युलर हूं और मैं नहीं हूं। अगर कहीं कुछ अच्छा है तो हमें उसे कहीं से भी लेना चाहिए।'

स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

Latest News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *