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लोकमान्य तिलक और सुभाषचंद्र बोस को भूली कांग्रेस सरकार

श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी, कलियुग वर्ष ५११६

अति आवश्यक सूची में लोकमान्य तिलक का नाम नहीं

मुंबर्इ – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में यूनिटी ऑफ स्टैच्यू के माध्यम से सरदार बल्लभ भाई पटेल को फिर से जीवंत कर दिया है। साथ ही भाजपा के सत्ता में आते ही वीर सावरकर की प्रतिमा के भी अच्छे दिन आ गए, लेकिन महाराष्ट्र के सपूत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक अपने ही राज्य में उपेक्षित हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कार्यालयों में महापुरुषों की तस्वीर लगाए जाने के लिए २८ महान लोगों की जो सूची बनाई है, उसमें तिलक का भी नाम है, लेकिन इन २८ में से जिन महापुरुषों की तस्वीर लगाना अति आवश्यक है, उस सूची से लोकमान्य तिलक का नाम अलग कर दिया गया है।

महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने बताया कि सिर्फ लोकमान्य तिलक ही नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद बोस का भी नाम सूची में नहीं है। यही वजह है कि नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में भी तिलक की मूर्ति नहीं लगाई गई है। इससे महाराष्ट्र सरकार की महापुरुषों के प्रति मानसिकता का पता चलता है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर जिस जगह पर १ अगस्त १९२० में लोकमान्य तिलक का अंतिम संस्कार किया गया था, वहां स्वराज्य भूमि स्मारक बनाने की मांग हो रही है। इससे नई पीढ़ी को उनके कार्यों और विचारों से प्रेरणा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि स्वराज्य भूमि स्मारक समिति के प्रमुख प्रकाश सिलम समाधि स्थल के साथ ही यहां ध्वजस्तंभ बनाना चाहते हैं। समिति स्मारक का खर्च भी वहन करने के लिए तैयार है लेकिन सरकार इसकी इजाजत नहीं दे रही है।

स्त्रोत : अमर उजाला

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