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सहारनपुर दंगा : अखिलेश का मेहमान रहा है मास्टरमाइंड मोहर्रम अली !

श्रावण शुक्ल पक्ष षष्ठी, कलियुग वर्ष ५११६

लखनऊ (उत्तरप्रदेश) – सहारनपुर में हुए दंगे के मास्टरमाइंड मोहर्रम अली 'पप्पू' बेशक बसपा का सदस्य बताया जा रहा हो, लेकिन सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से उसकी नजदीकियों के ढेरों सबूत मौजूद हैं। पप्पू मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मेहमान भी रह चुका है।

एक अप्रैल को पप्पू ने सपा के पूर्व मंत्री संजय गर्ग के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनके सरकारी आवास, पांच कालीदास मार्ग पर मुलाकात की थी। उसी दिन संजय गर्ग ने सपा की सदस्यता ली थी। इससे पहले संजय गर्ग बसपा में थे तो पप्पू उनके साथ था। फिलहाल मोहर्रम अली सहारनपुर उप चुनाव में सपा प्रत्याशी संजय गर्ग की मदद करने की तैयारी में था।

मोहर्रम अली के साथ जब अखिलेश यादव की मुलाकात हुई थी, उस समय सहारनपुर के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री राजेंद्र राणा के साथ एक अन्य दर्जा प्राप्त मंत्री सरफराज खान भी मौजूद थे। इस दिन संजय गर्ग ने सपा की सदस्यता ली थी। इसके पहले तक वह बसपा में थे।

पप्पू से संजय के संबंध की कहानी उनके फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट एक फोटो भी बयां कर रही है। इसमें संजय गर्ग पप्पू के साथ हैं। इस बारे में पूर्व मंत्री संजय गर्ग का कहना है कि एक अप्रैल को उन्होंने सपा की सदस्यता ली थी और बहुत सारे लोग वहां मौजूद थे। संजय गर्ग ने कहा कि उस दौरान पप्पू वहां बैठा था, लेकिन उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। संजय गर्ग ने अपने फेसबुक एकाउंट पर पप्पू के साथ फोटो होने की जानकारी से इन्कार किया है। उन्होंने कहा है कि पप्पू ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार किया था। वह आज भी खुद को कांग्रेसी बताता है।

स्त्रोत : जागरण


अद्ययावत


सहारनपुर दंगा : गुरूद्वारेसे १० लाख रुपये लेने के बाद भी मोहर्रम अली उर्फ पप्पू ने करा दिया दंगा

श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्थी, कलियुग वर्ष ५११६
३१ जुलार्इ २०१४

Saharanpur riots: Main accused arrested, booked under National Security Act

लखनऊ : सहारनपुर दंगे के मुख्य आरोपी मोहर्रम अली उर्फ पप्पू की गिरफ्तारी के बाद से परत दर परत पूरा मामला खुलता जा रहा है। एसएसपी सहारनपुर राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि मोहर्रम अली 'पप्पू' ने स्वीकार किया कि विवादित जमीन का मामला निस्तारित करने को उसने गुरुद्वारा कमेटी से २५ लाख मांगे थे। इस बाबत उसको दस लाख का भुगतान भी हो चुका था।

इस स्थान पर १५ जुलाई से निर्माण चल रहा था। जब पप्पू को लगा कि उसे अब पैसा नहीं मिलेगा तो अचानक २५ जुलाई की रात तीन बजे थाने पहुंचा। पप्पू ने सहरी के वक्त का फायदा उठाया और कुतबुशेर मस्जिद के शहीद करने की अफवाह उड़ा भीड़ एकत्र कर ली और आगजनी शुरू करवा दी।

सौ लीटर केमिकल लेकर आए थे पप्पू के गुर्गे

सहारनपुर दंगा सुनियोजित था और गुरुद्वारा रोड व अंबाला रोड को पूरी तरह से तबाह करने की साजिश रची गई थी। इसके लिए पप्पू के गुर्गे आगजनी के लिए सौ लीटर केमिकल लेकर आए थे। दंगे के दो मुख्य आरोपी मोहर्रम अली उर्फ पप्पू और भतीजे इरशाद की गिरफ्तारी से कई रहस्यों से पर्दा उठा है। इसमें कुछ ऐसे राज है, जिनकी पुष्टि के लिए खुफिया विभाग की टीम ने पप्पू से जुड़े दर्जन से अधिक लोगों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए हैं। इनमें कुछ नेताओं के नंबर भी बताए जा रहे हैं, जिनसे पप्पू ने घटना से करीब दो-तीन घंटे पहले मोबाइल पर बात थी। पप्पू ने शहर को सांप्रदायिक हिंसा में झोंकने के लिए प्लानिंग की थी, जिसका पता पप्पू के बेटे दानिश, भतीजे इरशाद व हाजी इरफान को २४ घंटे पहले चल गया था। पूछताछ के दौरान पप्पू के बेटे दानिश ने पुलिस के सामने इसका खुलासा भी किया।

पप्पू के कहने पर उसके गुर्गो ने कुतुबशेर चौराहे के पास ही शुक्रवार को सौ लीटर केमिकल डिब्बों में भर रख दिया था। पप्पू की साजिश थी कि अगर वार्ता सफल नहीं हुई तो उसका इशारे मिलते ही भीड़ में शामिल गुर्गे आगजनी व लूटपाट शुरू कर दें। अधिकारियों को उस पर शक न हो इसलिए वह भीड़ को समझाने का नाटक करता रहा। बात न बनने पर भीड़ में शामिल दानिश, भतीजा इरशाद के साथ आए सौ से अधिक युवकों ने पप्पू का इशारा मिलते ही लूटपाट और आगजनी शुरू कर दी। साजिश में पप्पू अस्सी फीसद सफल भी रहा, लेकिन उसे नहीं पता थी कि वह अपने जाल में खुद फंस जाएगा। सांप्रदायिक हिंसा का तीसरा मास्टर माइंड हाजी इरफान जो विवादित प्लाट के मुकदमे में वादी है। वह आज तक विवादित स्थल तक पर नहीं गया था। उसने भी पप्पू के इशारे पर ही मुकदमा दर्ज कराया था।

पप्पू की संपत्ति भी होगी कुर्क

कुछ सालों में अथाह संपत्ति के मालिक बने मोहर्रम अली उर्फ पप्पू की संपत्ति का भी लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। हालांकि अधिकारिक रुप से इसकी कोई पुष्टि नहीं कर रहा है, पर बताया गया है कि डेढ़ दशक पहले किराये के मकान में रहने वाले मोहर्रम अली उर्फ पप्पू अब करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। उसके विरुद्ध पहले भी कई मुकदमे है। पप्पू की संपत्ति और आय के स्त्रोतों की जांच खुफिया विभाग कर रहा है।

राजनीतिक कनेक्शन

पुलिस के अनुसार पप्पू कांग्रेस नेता इमरान मसूद का सहयोगी है। हालांकि इमरान ने कहा पप्पू से मेरा कोई संबंध नहीं है और उस दिन मौके पर भीड़ को समझाते समय पप्पू ने मेरे साथ अभद्रता की और लोगों को मेरे खिलाफ उकसाया। मोहर्रम अली सभासद रह चुका है और पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है। उसके खिलाफ पहले भी सहारनपुर के जनकपुरी, मंडी व कुतुबशेर थानों में बवाल करने से लेकर फर्जीवाड़े तक के दर्जनभर मामले हैं। गुरुद्वारा सिंहसभा का भी आरोप है कि २००१ में मोहर्रम अली ने अपने को पर्दे के पीछे रखकर अब्दुल वहाब नाम के एक शख्स से वाद दायर करवाया। इसी के चलते यह विवाद इतना बढ़ा।

स्त्रोत : जागरण


सहारनपुर दंगे का मुख्य आरोपी मोहर्रम अली गिरफ्तार

जुलै ३१, २०१४

श्रावण शुक्ल पक्ष चतुर्थी, कलियुग वर्ष ५११६

सहारनपुर (उत्तरप्रदेश) – सहारनपुर दंगे के मुख्य आरोपी मोहर्रम अली उर्फ पप्पू को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने पप्पू के अलावा उसके छह साथियों को भी गिरफ्तार किया।

पप्पू ने सिखों पर पथराव और गोलियां चलाने के लिए भीड़ को उकसाया था। पप्पू ने कांस्टेबल सहस्त्र पाल पर गोली चलाई थी। पाल शहर के अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। पुलिस ने दानिश,मोहम्मद इरशाद,मोहम्मद आबिद,मोहम्मद शाहिद और हाजी मोहम्मद इरफान को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सहारनपुर में साम्प्रदायिक हिंसा में तीन लोग मारे गए थे जबकि ३० लोग घायल हुए थे।

पुलिस के मुताबिक कुतुबशेर पुलिस थाने के घेराव के पीछे पप्पू ही था। घेराव के वक्त जमीन विवाद से जुड़े मामले पर दो समुदायों के लोग पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आपस में बातचीत कर रहे थे। पप्पू के भड़काने पर पुलिस स्टेशन के बाहर जमा भीड़ ने उत्पात मचाया। भीड़ ने लोगों पर फायरिंग की,दुकानों में आग लगाई,वाहनों को फूंका और पथराव किया। एक अधिकारी ने बताया कि पप्पू ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडे ने पप्पू की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

पांडे ने कहा कि हिंसा भड़काने के अन्य दोषियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न जगहों पर छापे मारे जा रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि हमने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से हिंसा के दोषियों की पहचान कर ली है। उन्होंने जल्द ही न्याय के दायरे में लाया जाएगा। जिला अधिकारी ने बताया कि हिंसा के दोषी लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट और गुंडा एक्ट लगाया जाएगा। बुधवार को छह सदस्यीय भाजपा टीम दंगा प्रभावित इलाकों में पहुंची।

टीम ने जिला प्रशासन पर दंगा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई में विफल रहने का आरोप लगाया। भाजपा के प्रतिनिधिमण्डल के सदस्य और विधायक सुरेश राणा ने कहा कि लकड़ी के काम और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए मशहूर शहर को जिला प्रशासन की विफलता और सरकार ने जिस तरीके से स्थिति को हैंडल किया,उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। राणा ने आरोप लगाया कि दंगाईयों ने पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे उत्पात मचाया,दुकानों में आग लगाई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

भाजपा प्रतिनिधिमण्डल ने दंगे में मारे गए ट्रेड यूनियन लीडर हरीश कोचर के परिजनों से मुलाकात की और दंगे के दौरान जलाई गई दुकानों को देखा। राणा ने कहा कि सपा के शासन के दौरान राज्य में १५० दंगे हो चुके हैं। दंगाईयों को समाजवादी पार्टी शह दे रही है। समस्या उस वक्त पैदा हुई थी जब कुतुबशेर इलाके में शनिवार को एक समुदाय ने विवादित स्थल पर निर्माण कार्य शुरू करवाया। दूसरे समुदाय ने इसका विरोध किया। इसके बाद दोनों समुदाय आपस में भिड़ गए।

स्त्रोत : पत्रिका


 

सहारनपुर दंगा : सौ गज गुरुद्वारेकी जमीन के लिए करोड़ों की संपत्ति व कई जिंदगियां तबाह

श्रावण शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, कलियुग वर्ष ५११६
(२७ जुलार्इ २०१४)

सहारनपुर (उत्तरप्रदेश) – गुरुद्वारे की सौ गज जमीन के लिए सहारनपुर के लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन गए। भड़के दंगे में डेढ़ सौ से ज्यादा दुकानों के फूंक देने से करोड़ों से ज्यादा का नुकसान आंका जा रहा है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कई जिदंगी तबाह होने से परिवारों में कोहराम मचा गया।

कुतुबशेर थाने के नजदीक गुरुद्वारे की विवादित चल रही जमीन को लेकर जो दंगा हुआ, उसके पीछे कोई बड़ी वजह नहीं थी, बल्कि सौ गज जमीन के लिए दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन गए। ऐसा नहीं कि इस जमीन पर विवाद पहली बार हुआ हो, इससे पहले भी चार साल से चल रहे विवाद में बीस बार दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ चुके हैं।


शनिवार को दंगाइयों ने एक-दूसरे पर सीधा हमला कर दिया। दंगे में करोड़ों के सामान को फूंक डाला गया। अंबाला रोड पर जिन दुकानों को आग के हवाले किया है, उनकी प्रतिदिन की दुकानदारी ही लाखों रुपये की होती थी। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि कई जिंदगी खत्म होने से परिवारों तबाह हो गए।

मेरठ जोन के आइजी आलोक शर्मा का कहना है कि सौ गज जमीन के पीछे दंगाइयों ने सौ से ज्यादा दुकानों को आग के हवाले कर दिया। अभी तक प्रथम जांच में फूंकी गई दुकानों में दस करोड़ का नुकसान माना जा रहा है। स्थिति पूरी तरह से काबू में कर ली गई है।

स्त्रोत : दैनिक जागरण


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