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मेडिकल सर्विसेज कंपनीया ब्लैक लिस्टेड करने के बजाय दे रहे ठेका

श्रावण कृष्ण पक्ष षष्ठी, कलियुग वर्ष ५११६

रायपुर (छत्तीसगढ) – जिन दवा कंपनियों के कारण सरकार को पूर्व में जनता से खरी-खोटी सुनना पड़ी थी, उन्हीं कंपनियों को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कंपनी (सीजीएमएससी) के कुछ अधिकारी फिर से उपकृत करने की तैयारी में जुटे हैं। ये दवा कंपनियां वे हैं जिनकी दवाइयों में काकरोच व फफूंद तक निकल चुके हैं। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जो ठेका लेने के बावजूद जनता तक दवा ही नहीं पहुंचा सकीं। नियम के अनुसार तो इन्हें प्रदेश में ब्लैक लिस्टेड कर देना चाहिए, लेकिन सरकार द्वारा दवा सप्लाई के लिए बुलाए गए टेंडरों में ये कंपनियां शामिल हो गई हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन की लापरवाही से कई मरीजों को कुछ दवाओं के लिए अभी भी भटकना पड़ रहा है। जनता के इस दर्द की परवाह किए बगैर कुछ अधिकारी सिर्फ अपनी जुगत जमाने के लिए अनियमितता बरतने वाली कंपनियों को ठेका दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। सीजीएमएससी द्वारा उन दवा कंपनियों को दवा सप्लाई का आॅर्डर दिया जा रहा है, जो पूर्व में दवा सप्लाई में कई बार खरी नहीं उतरी है। करीब १४० करोड़ रुपए की दवाइयों के लिए सीजीएमएससी ने कुछ दिनों पहले टेंडर बुलाए हैं।


 

कंपनियां ऐसे होती हैं ब्लैक लिस्टेड

१. दवा सप्लाई न करने पर

२. दवाओं में खामियां पाए जाने पर

३. तय समय सीमा के अंदर पूरी दवा नहीं सप्लाई करने पर

४. दवा का बैच फेल होने पर

५. कंपनी के कागजात पूरे नहीं होने पर

६. दूसरी दवा सप्लाई करने पर

 

किस कंपनी की, क्या खमियां

सायनो फार्मा : फरवरी माह में सायनो फार्मा द्वारा की गई दवा सप्लाई में सिरप की बॉटल में कॉकरोच मिला। वहीं कई बार इस कंपनी ने तय मात्रा में दवाई सप्लाई नहीं की और भुगतान पूरा लिया गया।

डीजे लेबोरेटरी : जुलाई माह में इस कंपनी द्वारा सप्लाई की गई ग्लूकोज रिंगर लेक्टर आईवी μल्यूड की बॉटल में फफूंद लगा पाया गया। फफूंद मिलने पर दवा स्टॉक के उपयोग पर रोक लगा दी गई। दवा निर्माण की जांच में भी यह कंपनी संदिग्ध पाई गई।

ओम बायोमेडिक : इस कंपनी को कई बार सीजीएमएससी ने दवा सप्लाई का ठेका दिया, लेकिन इसने कई मर्तबा दवा सप्लाई ही नहीं की। जो दवा सप्लाई की वह भी आधी ही की। वहीं कंपनी की दवा का कई बार बैच फेल भी हुआ।

ओमेगा बायोटेक : इस कंपनी की दवा में कई बार खामियां पाई गई। इसके बैच फेल हुए, कंपनी न दवाईयां भी पूरी सप्लाई नहीं की। वहीं कई बार टेंडर पाने के बाद इसने कई दवाएं सप्लाई ही नहीं की है।

जैकसन लैबोरोटिस : इस कंपनी ने कई बार दवा सप्लाई तय समय पर नहीं की। इस वजह से सरकारी अस्पतालों में लोग दवा के लिए भटकते देखे गए। वहीं कई बार जांच में भी दवा गलत पाई गई।

 

वन अधिकारी को बना दिया प्रभारी

सीजीएमएससी के डायरेक्टर प्रताप सिंह हैं। मूल रूप से वह भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं, जिनकी यहां नियुक्ति शुरू से ही विवादों में है। आंख फोड़वा कांड (गलत दवाई के कारण करीब दो दर्जन की आंखें चली गई थी) हो, सिरप से कॉकरोच निकलना या शिशु संरक्षण माह में दवाइयों का टोटा होने का मामला, इन्हीं के कार्यकाल में हुआ है। विभाग के टेक्निकल डायरेक्टर स्वागत साहू पर भी कई आरोप लगाए जाते रहे हैं।

 

कॉर्पोरेशन कार्रवाई करेगा

कुछ कंपनियां विभाग द्वारा की गई जांच में गलत पाई गई हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरशन उन पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। – प्रताप सिंह, एमडी, सीजीएमएससी

 

सरकार के दाम न पर लगाएंगे दाग

आरोपी कंपनियों को ठेका दिलाकरकतिपय अधिकारी फिर एक बार सरकार के दामन दाग लगाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि कोई घटना होती है तो सरकार पर आंच आएगी। केंद्र सरकार भी दवाइयों के मानक स्तर को लेकर सख्त हो रही है।

 

रोक के बाद भी भर दिया टेंडर

बीते साल ओमेगा बायोटेक कंपनी की दवा में खामियां पाए जाने पर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरशन ने कार्रवाई करते हुए ओमेगा बायोटेक कंपनी को ३ साल टेंडर नहीं भरने का आदेश जारी किया। इसके बाद भी हाल ही में जारी हुए १४०  करोड़ रुपए की दवा सप्लाई के टेंडर में यह कंपनी शामिल हुई है।

 

खरीदी का जिम्मा सीजीएमएससी को

राज्य शासन ने राज्य के सभी अस्पतालों में दवा और उपकरण खरीदी का जिम्मा सीजीएमएससी को दिया है। सीजीएमएससी ही टेंडर कर दवाओं की खरीदी कर रही है, लेकिन सीजीएमएससी द्वारा खरीदे जा रहे दवा और उपकरणों में खामियां आने के बाद भी राज्य सरकार सीजीएमएससी के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठा पा रही है।

 

स्त्रोत : दैनिक दबंग दुनिया

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