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चीन के सैनिकों ने लद्दाख की पैंगांग झील में घुसपैठ की कोशिश की !

आषाढ शुक्ल पक्ष तृतीया, कलियुग वर्ष ५११६


लेह – दोस्ती की आड़ में पीठ में छुरा घोंपने वाली अपनी नापाक हरकतों से चीन बाज नहीं आ रहा है। उसने फिर भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की। घुसपैठ के लिए अब चीन के सैनिकों ने जमीनी क्षेत्र की बजाय लद्दाख में ऊंचाई पर स्थित १३५ किलोमीटर लंबी पैंगांग झील को चुना है। दोनों देशों में बंटी इस झील की भारतीय जल सीमा में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की टुकड़ी ने पिछले दिनों कई बार घुसने की कोशिश की।

२७  जून को चीनी सैनिकों की गश्ती मोटरबोट ने झील में निर्धारित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पार कर भारतीय जल सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की। लेकिन भारतीय जवानों ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया। भारतीय जवानों से आमना-सामना के बाद पीएलए टुकड़ी को पीछे हटना पड़ा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आमना-सामना के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे को बैनर दिखाकर झील स्थित उक्त क्षेत्र पर अपने कब्जे का दावा किया। सूत्रों का कहना है कि चीन ने घुसपैठ की यह हालिया कोशिश लेह से १६८  किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख स्थित पैंगांग झील के उत्तरी किनारे से की थी। सूत्रों के मुताबिक पीएलए की मोटरबोट टुकड़ी झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से गश्त करने के लिए आती है। इन्हीं क्षेत्रों से चीनी सैनिक कई बार भारतीय जलसीमा में घुसपैठ कर जाते हैं। सेना का कहना है कि उनकी कोशिशों को हर बार नाकाम कर दिया जाता है।

२७  जून को झील में जिस स्थान पर भारत और चीन के जवानों के बीच आमना-सामना हुआ था, उसे फिंगर-आठ यानी सिरी जाप कहते हैं। जानकारों का कहना है कि इसी स्थान पर प्राय : दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ जाती हैं। सिरी जाप के आखिरी छोर फिंगर-चार में झील के किनारे तक चीन ने सड़क बना रखा है, जहां पीएलए की एक बड़ी टुकड़ी तैनात है। सूत्रों ने बताया कि १३५  किलोमीटर लंबी इस झील का ४५  किमी भारतीय क्षेत्र में पड़ता है, जबकि बाकी ९०  किमी पर चीन का कब्जा है।

सेना और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि झील के किनारों में स्थिति हमेशा तनावपूर्ण रहती है। चीनी सैनिक भारतीय जल सीमा में घुसपैठ करने की प्राय : कोशिश करते हैं, जबकि भारतीय गश्ती दल उन्हें खदेड़ देता है। सेना के अधिकारी के अनुसार, पिछले वर्ष मई में दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में तीन हफ्ते तक चली घुसपैठ की घटना के बाद चीन के सैनिकों ने कई बार झील स्थित भारतीय जल सीमा में घुसने की कोशिश की। लेकिन हर बार उन्हें भागना पड़ा।

प्रवक्ता ने जवाब देने से किया इन्कारउधमपुर स्थित सेना की उत्तरी कमान के प्रवक्ता कर्नल एस गोस्वामी ने इस बारे में पूछे गए किसी भी सवाल का जवाब देने से इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि इस बारे में सेना के पीआरओ ही कुछ बता सकते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जब इस बारे में शनिवार को पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि देश की सेना सीमा की हिफाजत करने के लिए सक्षम है। ऐसी किसी घटना का वह मुंहतोड़ जवाब देगी।

स्त्रोत : जागरण 

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