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मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय – मंदिर में जाने के लिए लागू करें ड्रेस कोड

चेन्नै : तमिलनाडु के मंदिरों में एक जनवरी २०१६ के बाद एक ड्रेस कोड को लागू किया जाएगा। मद्रास उच्च न्यायालय ने मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस कोड लागू करने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि पुलिस यह सुनिश्चित करे कि ड्रेस कोड का पालन किया जा रहा है या नहीं। उच्च न्यायालय ने पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती और शर्ट या पायजामा के साथ ऊपर का कोई कपड़ा ड्रेस कोड तय किया है।

इसी तरह महिलाआें के लिए साड़ी, आधी साड़ी या चूड़ीदार के साथ ऊपर का कपड़ा पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। न्यायालय ने बच्चों को कोई भी पूरा शरीर ढकने वाला कपड़ा पहनने की अनुमति दी है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई बेंच के जस्टिस ए वैद्यनाथ ने यह आदेश दिया है। ये आदेश एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका त्रीची जिले के एक मंदिर में नृत्य-गान कार्यक्रम पर रोक के लिए दायर की गई थी।

जस्टिस वैद्यनाथ ने कहा कि ड्रेस कोड लागू करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य लोगों को अनुचित कपड़े पहनकर मंदिर जाने से रोकना है। जस्टिस ने निर्णय सुनाते हुए ईसाइयत और इस्लाम का उदाहरण भी दिया। जहां धार्मिक कार्यों के दौरान ड्रेस कोड की परंपरा है। जस्टिस ने कहा कि हाल ही में सोमनाथ मंदिर में ड्रेस को़ड लागू किया गया है। यहां शॉर्ट स्कर्ट्स और शॉर्ट पहनकर प्रवेश प्रतिबंधित है। मंदिर से २०० मीटर पहले ही एक बोर्ड लगा है जिसपर लिखा है कि अनुचित और अमर्यादित पोशाक पहनकर मंदिर में न घुसें।

इसी तरह तिरुपति देवस्थान भी सभी के लिए ड्रेस कोड को लागू कर चुका है। जस्टिस ने कहा कि इन सारे मामलों को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के मंदिरों में भी ड्रेस कोड लागू करना अपरिहार्य हो गया। जस्टिस ने आदेश दिया कि सारे मंदिरों को सर्कुलर भेज दिए जाएं ताकि ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन हो सके।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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