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इराक में भारतीयों से खूनी खेल खेल रहे हैं आतंकवादी !

आषाढ कृष्ण पक्ष द्वादशी, कलियुग वर्ष ५११६


चंडीगढ़ – ISIS के आतंकवादियों ने इराक में भारतीयों समेत प्रवासी मजदूरों से वास्तव में जिंदगी और मौत का खूनी खेल खेलना शुरू कर दिया है। वहां काम करने वालों से अरबी भाषा के कुछ शब्दों के अर्थ पूछे जाते हैं। गलत जवाब देने वालों पर आतंकवादी उन पर अपने निशाने की प्रैक्टिस करते हैं। बाकी लोगों को अपमानजनक कामों में लगा दिया जाता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने बगदाद से पश्चिम-उत्तर में ७०  किलोमीटर दूर दुजेल में मौजूद कुछ पंजाबी लोगों से फोन पर बातें कीं। उन्होंने पंजाब के नवांशहर के एक नौजवान के बारे में बताया। आतंकवादियों ने उसे दुजेल के करीब एक बस से उतारा और एक अरबी शब्द का अर्थ बताने को कहा। जब वह नहीं बता पाया, तो उसे गोली मार दी। हालांकि, गोली लगने पर भी वह बच गया। ३  दिन पहले हुई इस घटना ने सभी कामगारों को और परेशानी में डाल दिया है।

मोसुल पर कब्जे के बाद बगदाद की ओर बढ़ते हुए आतंकवादी वहां पहुंचे थे। हालांकि, बाद में सरकार ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया। दुजेल बगदाद के उत्तर की तरफ सलाहुद्दीन प्रांत के ४ शहरों में से एक है, जहां आतंकवादी लड़ रहे हैं लेकिन कब्जा नहीं कर पाए हैं।
एक पंजाबी नौजवान ने हमसे कहा, 'उन्होंने हमसे हमारे धर्म के बारे में पूछा और इराक में सुन्नियों को समर्थन करने के लिए कहा। इसके बाद वे हमें अपनी बस में ले गए और हमें अपने खेल में शामिल होने के लिए कहा। उन्होंने हमें अरबी में कुछ शब्द पढ़ने के लिए दिए और उनका अर्थ पूछा। जो इसमें असफल रहे, उन्हें सजा दी गई। वे जोर दे रहे थे कि अगर हमें यहां काम करना है, तो हमें इराक की भाषा और संस्कृति का आदर करना होगा।' सजा में गोली मारने के अलावा आतंकवादियों को नहलाना और उनके जूते व कपड़े साफ करना शामिल था।

एक नौजवान ने बताया, 'उन्होंने हमारी सांस सूंघी कि कहीं हमने शराब तो नहीं पी हुई है।' आतंकवादियों ने शराब की बोतलें चेक करने के लिए उनके रहने की जगहों पर भी छापे मारे। एक भारतीय कामगार ने बताया, 'आतंकवादियों के एक ग्रुप ने हमें चिलचिलाती गर्मी में कई किलोमीटर दूर भेजकर पानी भरवाया।'

भारतीय मजदूरों ने बताया कि वे शहर से दूर कंस्ट्रक्शन साइट्स पर रह रहे हैं। वे कंस्ट्रक्शन मटीरियल से घिरे हुए हैं और शाम होते ही वे लाइट्स बुझा देते हैं, ताकि किसी की नजर में न आ सकें।

ज्यादातर भारतीय मजदूर १० x १०  के कंटेनर रूम में रह रहे हैं। हर कंटेनर रूम ४  लोगों के लिए है। एक मजदूर ने कहा, 'हमने यहां आकर गलती की और हम जल्द से जल्द वापस लौट जाना चाहते हैं।'

स्त्रोत : नव भारत टाइम्स

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