
नई देहली : वैद्यकीय विज्ञान के सहाय्य से गंगा के पानी में कितना गुण है, इसका पता लगाने के लिए संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। एम्स सहित आईआईटी देहली, आईआईटी कानपुर, आईसीएमआर के वैज्ञानिकोंका समूह अगले छह महीने में अपने-अपने स्तर पर संशाेधन कर अपनी-अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के बाद ही आगे की योजना की जाएगी। एम्स के माइक्रोबायॉलजी विभाग का समूह संशाेधन से जुडा है। यह समूह गंगा के पानी के उस गुणोंपर संशाेधन करेगी, जिससे यह पता चल सकेगा कि, उपचारके लिए इस पानी का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
सोमवार को एम्स में गंगा के पानी के ऊपर नॉन प्यूरिफाइंग प्रॉपर्टीज पर कार्यशाला का आयोजन किया गया था । कार्यशाला के समय सभी वैज्ञानिकों ने कहा कि, अब तक गंगा नंदी के पानी के उपर हुए संशाेधन से यह सिद्ध हो चुका है कि, इसमें बैक्टीरियोफाज (जीवाणुभोजी) पाया जाता है। बैक्टीरियोफाज एक प्रकार का विषाणू होता है, जो बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता है। संशाेधन में पाया गया है कि, केवल गंगा नदी में ही सबसे ज्यादा बैक्टीरियोफाज पाया गया है। कार्यशाला में शामिल वैज्ञानिकोंने बताया कि गंगा के पानी में वैद्यकीय गुणधर्म को सिद्ध करने के लिए ही संशाेधन की जरूरत है ताकि बैक्टीरिया के खिलाफ हो रहे एंटीबायॉटीक्स के उपयोग को अच्छा बनाकर एंटीबायॉटीक्स नीति में बदलाव किया जा सके।

गंगा का यदि दो साल तक भी घर में रखा जाए तो भी गंध नहीं आता है, उसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं आता है। इस कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे स्वास्थ्यमंत्री जे.पी.नड्डा ने कहा कि, गंगा नदी के पानी का गुणधर्म है कि, यह कभी नहीं सडता है। उन्होंने कहा कि, छह महीने बाद हम एक सम्मेलन फिर करेंगे, जिसमें सभी संशाेधन पत्रोंपर चर्चा करेंगे और गंगा नदी के जल का स्वास्थ्य पर पडनेवाले अच्छे परिणाम को सिद्ध करेंगे । जे. पी. नड्डा ने जल संसाधन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर इस संशाेधन को करनेवाली संस्था आईसीएमआर को वित्तीय मदद देने का आश्वासन दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि, इस संशाेधन के परिणामों को एक घोषणा के रूप में प्रकाशित किया जाएगा।
इस कार्यशाला के बारे में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि, यह पहल स्वच्छ गंगा के राष्ट्रीय अभियान को एक नई दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के तीन पहलू हैं: धार्मिक, आर्थिक और मेडिकल बेनफिट। गंगा नदी के धार्मिक और आर्थिक पहलुओंके बारे में पहले से पता है, लेकिन गंगा के पानी के हेल्थ पर पड़नेवाले प्रभाव पर संशाेधन कभी नहीं किया गया। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्यों कि यह राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान को एक दिशा प्रदान करेगा।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स








