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युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य के बारे में जानें सब कुछ

आषाढ कृष्ण पक्ष तृतीया, कलियुग वर्ष ५११६


जब देश की सीमाओं पर निगरानी रखना मुमकिन हो, तो मनोबल खुद ब खुद बढ़ जाता है। आईएनएस विक्रमादित्य की क्षमता हमारी नौसेना को यही हौसला देने वाली है। करीब ५०० किलोमीटर की कोई भी गतिविधि इस युद्धपोत की नजरों से नहीं बच पाएगी।

देश को तीन तरफ घेरने वाली समंदर की लहरें व्यापार के लिहाज से सबसे बड़ी ताकत भी है और सुरक्षा के नजरिए से सबसे बड़ी चुनौती भी।

हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी- हजारों मालवाहक जहाजों का ठिकाना हैं ये समुद्री तट और अथाह समंदर की लहरों पर तैरता हुआ सैन्य दुर्ग। अभेद सुरक्षा और अचूक वार करने वाले हथियारों से लैस है आईएनएस विक्रमादित्य। 

आईएनएस विक्रमादित्य


क्या खास है इस युद्धपोत में 

१. भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने से पहले इसे 'बाकू' और 'एडमिरल गोर्शकोव' के नाम से जाना जाता था। रूस में बने इस युद्धपोत को खरीदने का सौदा करीब १५,००० करोड़ रुपये में तय हुआ।

२. ४४,५७० टन के वजन वाले आईएनएस विक्रमादित्य की ऊंचाई ६० मीटर यानी २० मंजिली इमारत जितनी है। 

३. २२ डेक वाले इस युद्धपोत पर १६०० से १८०० नौसैनिकों की तैनाती रहेगी।

४. समंदर की लहरों पर आईएनएस विक्रमादित्य ३० नॉट यानी करीब ५४ किमी/घंटा की रफ्तार से सफर कर सकता है।

५. २८४ मीटर लंबे इस पोत पर २४ मिग-२९ और १० हेलिकॉप्टर तैनात किए जाएंगे।

६. आईएनएस विक्रमादित्य युद्धपोत के ५०० किलोमीटर के दायरे में आने वाले दुश्मनों का पता लगा लगा लेता है। 

७. माइक्रोवेव लैंडिग सिस्टम की वजह से लड़ाकू जहाजों की लैंडिग कई हालात में मुमकिन है। 

८. मॉडर्न कम्यूनिकेशन सिस्टम से लैस आईएनएस विक्रमादित्य मिग-२९ के साथ बेहद मजूबत किलेबंदी कर सकता है।

रूसी बेड़े में महज छह महीने तक रहने वाला बाकू अपने विक्रमादित्य के नए अवतार में नई भूमिका के लिए तैयार है। बाकू से विक्रमादित्य तक के सफर के दौरान इसमें कई बदलाव किए गए हैं। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इसे गेमचेंजर बताया था।

किसी देश की फौजी ताकत में नौसैनिक बेड़े की अहम भूमिका होती है। इस वक्त अमेरिका के पास ११ ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। विक्रमादित्य के आने के भारत, इटली के बराबर होगा, जिसके पास २ ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। चीन, इंग्लैंड, फ्रांस, रूस, स्पेन, ब्राजील और थाईलैंड के पास एक-एक ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

समुद्री तटों की सुरक्षा और आतंकी घुसपैठ के खतरों को देखते हुए आईएनएस विराट के साथ आईएनएस विक्रमादित्य की मौजूदगी नौसेना के मनोबल में नई जान फूंक देगी।

स्त्रोत : आजतक

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