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गंगा रक्षा व स्वच्छता के लिए १५ को दिल्ली में आयोजित होगा संत सम्मेलन

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वादशी, कलियुग वर्ष ५११६


हरिद्वार (उत्तराखंड) : दिल्ली कालकापीठाधीश्वर और गंगा रक्षा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने कहा कि संत विकास के विरोधी नहीं हैं। बल्कि संतों का ध्येय है कि गंगा में हर वह काम बंद होना चाहिए जो मानव जाति के लिए आगामी खतरे का कारण बने, क्योंकि गंगा को संत मां मानकर प्रेम करता है। इन्हीं सब बातों पर संकल्प लेने के लिए १५ जून को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

कालका पीठाधीश्वर गुरुवार को धर्मनगरी में संत सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए थे। इसके बाद उन्होंने यूथ हॉस्टल में पत्रकार वार्ता बुलाई।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संत गंगा रक्षा के लिए आगे आएं। इसके लिए विचार विमर्श करने के लिए एक वृहद मंच पर देश विदेश के संतों को बुलाया जा रहा है। इसमें नेपाल और फिजी राष्ट्रों के कुछ संत भी प्रतिभाग करने के लिए आ रहे हैं। श्री अवधूत ने कहा कि संत समाज गो और गंगा की रक्षा के लिए ही काम कर रहा है। गंगा पर बने बांध और निर्माणाधीन बांध जनता के लिए अभी क्षणिक लाभ दे रहे हैं। जबकि, आने वाले समय में इन्हीं से मानव जाति को खतरा होगा।

यह पूछने पर कि गंगा रक्षा अभियान की अध्यक्ष उमा भारती को गंगा रक्षा मंत्री बनाया गया है तो इस अभियान की सार्थकता पर कितना भरोसा किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है और संत समाज अपनी जगह।

उमा भारती से अपेक्षाएं तो बहुत हैं लेकिन वे इन पर कितनी खरी उतरेंगी इसका फैसला समय करेगा। भाजपा सरकार कितना संतों का सहयोग करेगी के उत्तर में उन्होंने कहा कि भारत सरकार के अब तक के वादे और प्रधानमंत्री के संकल्पों को देखकर उम्मीद जताई जा सकती है कि गंगा को अब अविरल और स्वच्छ करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

स्त्रोत : जागरण

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