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जानें, कौन है तहरीक-ए-तालिबान? भारत को बनाना चाहता है इस्लामिक राष्ट्र

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११६ 


(तस्वीर में: हकीमुल्लाह मुल्ला)

इंटरनेशनल डेस्क : कराची एयरपोर्ट पर हुए फिदायीन हमले में २६ लोगों की मौत हो गई है। जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार देर रात कुछ आतंकियों ने हमला बोल दिया। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी आतंकियों को मार गिराया गया है और एयरपोर्ट को आजाद करा लिया गया है। 

तहरीक-ए-तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है। इसे टीटीपी या कई बार पाकिस्तान तालिबान  के नाम से भी जाना जाता है। यह अफगानिस्तान के तालिबान से अलग है। हालांकि, दोनों संगठनों की विचारधारा करीब एक जैसी है।  
तहरीक-ए-तालिबान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में शरिया कानून लागू कर कट्‌टरपंथी इस्लामी अमीरात बनाना है। तहरीक का मतलब होता है अभियान और तालिब शब्द का अर्थ छात्र या धार्मिक शिक्षा मांगने वाला। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का मतलब 'पाकिस्तानी छात्र अभियान' है। 

अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला करने के बाद इस संगठन की शुरुआत पाक-अफगान सीमा दक्षिणी वजीरिस्तान के कबीलाई इलाकों की गई थी। कट्‌टरपंथी लोगों के अलग-अलग संगठनों ने पाकिस्तान में तालिबान के समर्थन का अभियान शुरू किया था।

जुलाई २००७ में लाल मस्जिद में सेना के कार्रवाई से नाराज होकर दिसंबर २००७ में बैतुल्लाह मसूद ने १३ समूहों के साथ टीटीपी की शुरुआत की थी। संगठन की शूरा बैठक में अफगानिस्तान में नाटो फौजों और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ जिहाद का फैसला लिया था। पाकिस्तान तालिबान ने भारत के खिलाफ भी जिहाद की बात की थी और यहां शरिया कानून लागू करने, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को खत्म करने की बात कही थी।


(तस्वीर में: रेडियो मुल्ला)

कौन है नेता  

टीटीपी को हमेशा से ही नेता की कमी खली है। संगठन की नींव डालने वाला बैतुल्लाह मेहसूद अगस्त २००९ में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया। उसके बाद संगठन में नेता बनने की होड़ शुरू हो गई। हकीमुल्लाह मेहसूद और वली-उर-रहमान के बीच कड़ा मुकबला था।
 तालिबान शूरा ने हकीमुल्लाह को टीटीपी का नेता बनाया। वहीं, वली-उर-रहमान को संगठन का उपनेता चुना गया। मई २०१३ में वली की ड्रोन हमले में मौत हो गई। बाद में हकीमुल्लाह ने लतीफ मेहसूद को उपनेता बना दिया। उसे अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान के लोगर प्रांत से अक्टूबर २०१३ में गिरफ्तार कर लिया। नवंबर २०१३ में हकीमुल्लाह के ड्रोन में मारे जाने के बाद संगठन की कमान मौलाना फजलुल्लाह के हाथ में है। फजलुल्लाह को रेडियो मुल्ला के नाम से भी जाना जाता है।


(तस्वीर में: बैतुल्लाह मेहसूद)

क्या हैं मुख्य उद्देश्य 

इस्लामिक शरिया कानून को लागू करना। अफगानिस्तान में नाटो फौज के खिलाफ जिहाद और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ रक्षात्मक जिहाद करना।  
खैबर पख्तूख्वां के स्वात घाटी में और उत्तरी वजीरिस्तान में सैन्य कार्रवाई को मुंहतोड़ जवाब देना।  
फाटा (फेडरल एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज) के कबीलाई इलाके में सेना के सभी चेक प्वाइंट को नष्ट कर देना।  
पाकिस्तान सरकार के साथ किसी भी तरह की शांतिवार्ता नहीं करना। (हालांकि, बीते महीनों से शरीफ सरकार के साथ टीटीपी ने बातचीत के हामी भर दी थी।)  

पाकिस्तान सरकार से शांतिवार्ता  

मई २०१३ में नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद टीटीपी से बातचीत करने का प्रयास किया गया। टीटीपी की ओर से लाल मस्जिद के पूर्व मौलाना समीउल हक, मौलाना अब्दुल अजीज जैसों ने सरकार से बातचीत की थी। बाद में पाकिस्तानी सेना के २३ जवानों के सिर काटने की घटना के बाद सरकार ने नाराज होकर शांतिवार्ता भंग कर दी।

स्त्रोत : दैनिक भास्कर 

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