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बदायूं कांड : सुरक्षा के अभाव में पलायन को तैयार पीड़ित परिवार !

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष नवमी, कलियुग वर्ष ५११६


लखनऊ- सामूहिक दुष्कर्म के बाद परिवार की दो बेटियों की हत्या के बाद से बदायूं के कटरा सआदतगंज के पीड़ित परिवार अभी भी भय से नहीं उभर पा रहा हैं। उनकी सुरक्षा में भले ही पुलिस तैनात हो और नेताओं से मिला इंसाफ का भरोसा, लेकिन उन्हें किसी पर भी भरोसा नहीं बचा है। दबंगों का खौफ उनकी नजरों में अभी भी झलक रहा है।
करीब दस दिन बाद कल हालात सामान्य होने के बाद पीड़ित परिवार की सुरक्षा में लगी पुलिस को हटा लिया गया। पीड़ितों को पुलिस अधिकारियों से लेकर नेताओं ने पूरा इंसाफ दिलाने का भरोसा दिया है। घर पर भारी फोर्स तैनात की गयी लेकिन पीड़ित परिवारों का भय अभी दूर नहीं हो रहा है। वह कहते हैं कि नेता उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर चले गए किसी ने भी कोई कार्रवाई नहीं कराई है।

दबंग अभी भी दे रहे धमकी

पीड़ित परिवार को दबंगो से अभी भी लगातार धमकी मिल रही है कि पुलिस हटने के बाद उनका अंजाम जो होगा उसे दुनिया देखेगी। पीड़ित सोहन लाल के पास बेटी खोने के बाद चार बच्चे रह गए हैं। बड़ी बेटी की वह एक साल पहले शादी कर चुके हैं, बचे तीन लड़कों को दबंग कब जान से मार दें इसका भय सता रहा है, वहीं छोटे भाई जीवनराम की तो इकलौती पुत्री थी जिसे दरिंदों ने मौत के घाट उतार दिया। वह बीवी और खुद के लिए खतरा बता रहे हैं। दोनों भाई कहते हैं कि पुलिस हटने के बाद वह इस गांव से पलायन कर कहीं और जाकर बसेंगे।

कलंकित हो गई बगिया

चचेरी बहनों के साथ हैवानियत का खेल खेलने के बाद दरिंदों ने उन्हें मौत के घाट उतारकर जिस आम की बगिया को कलंकित कर दिया, वहां भीड़ हटने के बाद लोग जाने से डर रह हैं। गांवों में अधिकांश लोग अंधविश्वासी हैं, इसलिए इस बगिया में भीड़ हटने के बाद यहां के नाम से लोग सहम रह हैं। दो दिन पहले तक भीड़ से भरी बगिया अब सूनी हो गई है। मंगलवार के बाद बगिया से भीड़ हटनी शुरू हो गई थी। घटना के अगले दिन से ही डेरा डाले हुए मीडिया वाले भी अपनी गाडियां लेकर रवाना हो चुके थे। बुधवार को गांव में कमिश्नर का कार्यक्रम था, इसलिए कुछ मीडिया बंधु बाग में डटे रहे। सरकारी नुमाइंदों की भी सुरक्षा की दृष्टि से वहां पर भीड़ थी। कमिश्नर का दौरा होने के बाद हालात कुछ सामान्य हुए तो मीडिया कर्मियों समेत पुलिस फोर्स भी घटना स्थल से हट गया। कल दोपहर के वक्त घटना स्थल पूरी तरह से सूनसान हो गया। जहां हजारों की भीड़ लगी थी, वहां पर दो जानवरों के अलावा परिंदा भी दिखाई नहीं दिया। बच्चों से लेकर बड़ों तक के मन में इतना खौफ है कि वह बगिया की ओर जाने से भी डर रह हैं।

सावन में नहीं पड़ेंगे झूले

जिस बगिया में दो बहनों को फांसी पर लटकाया गया, उस बगिया में सावन के महीने में गांव की लड़कियां झूला डालकर सावन गीत गाती थीं। महीने भर इस बगिया में रौनक रहती थी और गर्मियों भर लोग यहां दोपहरी बिताते थे, आज घटना हो जाने से लोग बगिया के नाम से दहल रह हैं। लोगों का कहना है कि इस बगिया में अब झूले नहीं पड़े।

स्त्रोत : जागरण 

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