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सिंहस्थ कुंभमेले हेतु आवश्यक निधि प्राप्त न होनेपर नासिक महानगरपालिकाको ऋण लेना पडेगा !

ज्येष्ठ अमावस्या, कलियुग वर्ष ५११६

हज यात्रा हेतु अनुदान देनेवाला प्रशासन सिंहस्थ कुंभमेले हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं कराता, देशके हिंदू हेतु यह लज्जास्पद !

क्या महाराष्ट्रके भाजपावाले तथा बलाढ्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठन प्रशासनद्वारा आवश्यक राशि लाकर हिंदुओंकी लाज रखेंगे ?

नासिक – प्रत्येक १२ वर्ष पश्चात आनेवाले नासिकके कुशावर्त स्थित कुंभमेलेकी सिद्धता हेतु नासिक महानगरपालिकाके पास आवश्यक निधि उपलब्ध नहीं है । अत: २०१५ के कुंभमेले हेतु बुनियादी सुविधाओंके कामको विलंब हो रहा है । आवश्यक राशि न मिलनेपर कुंभमेले हेतु ऋण भी लेना पडेगा, नासिकके महापौर यतीन वाघने ऐसा बताया । (हिंदूबहुल देशमें एक तप (१२ वर्ष )के पश्चात आनेवाले हिंदुओंके कुंभमेले हेतु राज्यप्रशासन तथा केंद्रप्रशासनद्वारा आवश्यक राशि उपलब्ध न कराना, देशके सभी साधुसंतों तथा हिंदुओंका अपमान है ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )

१. नासिक महानगरपालिकाको कुंभमेलेकी सुविधाओं हेतु केंद्रप्रशासनसे न्यूनतम ५०० कोटि रुपए अपेक्षित हैं । मुख्यमंत्रीकी अध्यक्षतामें शिखर समितिने नासिक महानगरपालिकाको १ सहस्र ५२ कोटि रुपए देना अपेक्षित होते हुए केवल २२२ कोटि १७ लाख रुपए दिए हैं । (हज यात्रा करनेवालोंपर राशिकी वर्षा करनेवाले कांग्रेसी हिंदुओंके कुंभमेले हेतु छुटपुट राशि देते हैं ! इसीलिए ऐसे कांग्रेसवालोंको हिंदुओंने लोकसभा चुनावमें घर भेजा है । अब महाराष्ट्रके विधानसभा चुनावमें भी उनका स्थान दिखानेका समय आ गया है ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात )

२. नासिक राजस्व विभागके आयुक्त एकनाथ डवलेद्वारा महानगरपालिकाको भेजे गए पत्रमेंआवश्यक राशिकी पूछताछ कर कहा गया है कि राज्यप्रशासने महानगरपालिकाको आवश्यक राशिके ३३ प्रतिशत राशि अर्थात ३५० कोटि रुपए देना मान लिया है । शेष राशि महानगरपालिकाको एकत्रित करनी है । महानगरपालिकाने, प्रशासनको वह ७०० कोटि रुपए राशि एकत्रित करेगी यह बात सूचित की है; किंतु उसमेंसे ३५० कोटि रुपए राज्यप्रशासनसे प्राप्त होना अपेक्षित है । शेष ३५२.६१ कोटि रुपए कैसे एकत्रित करें, महानगरपालिका अभीतक इसका निर्णय नहीं ले सकी है ।

३. महापौर वाघने कहा, कुंभमेला केवल पालिकाका दायित्व नहीं । राज्य तथा कंद्र प्रशासनको भी इस हेतु नियोजन करना आवश्यक है । केंद्रशासन इलाहाबाद (प्रयाग ) को राशि देता है, उसी प्रकार वह नासिकको दे ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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