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हिंदू जनजागृति समितिका ओडिशा राज्यका अप्रैल २०१४ के प्रसारकार्यका ब्यौरा

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष सप्तमी, कलियुग वर्ष ५११६

१. संपर्क

किससे संपर्क किए ?    संख्या  
१. संत  (पू. चिदानंद स्वामी) 
२. संप्रदाय (योग वेदांत समिति ) 
३. हिंदुत्वनिष्ठ संगठन 
४. हिंदुत्वनिष्ठ
५. अधिवक्ता 
६. वार्ताकार
कुल  १०

२. मासिक वर्गणीदार 

भाषा   संख्या  
१. हिंदी 
२. अंग्रेजी    
कुल 
 

३. विविध स्थानोंपर आयोजित किए गए प्रवचन 

३ अ. रावेणशा विश्वविद्यालय, कटकमें धर्माचरणके विविध कृत्योंका महत्त्व स्पष्ट करना

१२.४.२०१४ को कटक स्थित रावेणशा विश्वविद्यालयमें महाविद्यालयीन छात्रों हेतु धर्मसत्संगका आयोजन किया गया । इस अवसरपर श्री. श्रीराम काणेने ध्वनिचित्रचक्रिकाद्वारा, धर्माचरणके विविध कृत्य तथा उनका महत्त्व, उदा. देवालयमें दर्शन कैसे करें ? तथा लव जिहादकी भयावहता  स्पष्ट की । 

३ आ. नर्मदा मंडप, भुवनेश्वर स्थित प.पू. आसारामजी बापूके अवतरण दिवसके अवसरपर आयोजित विशेष कार्यक्रममें विचार प्रस्तुत करना

प.पू. आसारामजी बापू संप्रदायकी ओरसे नर्मदा मंडप, भुवनेश्वरमें २०.४.२०१४ को प.पू. बापूजीके अवतरण दिवसके अवसरपर एक विशेष कार्यक्रमका आयोजन किया गया । इस अवसरपर कर्णावती (अहमदाबाद ) आश्रमकी प्रमुख कृष्णा बहन मुख्य अतिथि थीं । हिन्दू जनजागृति समितिकी ओरसे श्री. श्रीराम काणेने विचार प्रस्तुत किए । श्री. काणेने अपने प्रवचनमें उदाहरणसमेत प.पू. बापूद्वारा किए गए महान धर्मकार्यके साथ हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्थाद्वारा विविध स्तरोंपर दिए सक्रिय समर्थनका भी वर्णन किया ।

३ आ १. वर्षा तथा आंधीके कारण मंडपकी छत उड जानेपर भी श्रद्धालुओंने धीरज रखकर संयमसे डेढ घंटेके पश्चात ५०० श्रद्धालुओं/जिज्ञासुओंकी उपस्थितिमें कार्यक्रमका आरंभ किया

कार्यक्रम सायं ४ बजे था । उस समय अचानक आयी वर्षा एवं आंधीके कारण मंडपकी (कपडेकी) छत उड गई, किंतु प.पू. बापूजीके श्रद्धालुओंने धीरज नहीं छोडा । वर्षा रुकनेके पश्चात ५.३० बजे कार्यक्रमका आरंभ हुआ । ऐसे वातावरणमें भी भुवनेश्वर, तथा आसपासके जिलोंसे आए ५०० श्रद्धालु उपस्थित थे ।

३ इ. भुवनेश्वरके पटिया स्थित सरस्वती शिशु मंदिरमें प्रवचनद्वारा उदाहरणसमेत हिंदू संस्कृतिके अनुसार दैनंदिन जीवनके आचारोंका महत्त्व समझाना

२५.४.२०१४ को भुवनेश्वरके पटिया स्थित सरस्वती शिशु मंदिरमें, कक्षा ६ठी से १० वीं तकके छात्रों हेतु एक प्रवचन आयोजित किया गया । हिंदू संस्कृतिके अनुसार दैनंदिन जीवनमें कृत्य कैसे करें ? श्री. श्रीराम काणेने यह विषय कुछ उदाहरणोंके साथ समझाया, उदा. ‘हैलो’ न कहकर `नमस्कार,’ ‘जय श्रीकृष्ण’अथवा ‘हरि ॐ’ ऐसा क्यों कहें ? जनमदिन कैसे मनाएं ? एकाग्रता बढाने हेतु प्रार्थना तथा श्रीगणेशकी उपासना कैसे करें ? इस प्रवचनका लाभ १२५ छात्रोंने उठाया । भुवनेश्वर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर, यूनिट-३, में १० वीं के १५० छात्रों हेतु श्री. श्रीराम काणेने इसी प्रकारका प्रवचन दिया । 
– श्री. प्रकाश मालोंडकर, भुवनेश्वर (१३.५.२०१४)

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