ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष सप्तमी, कलियुग वर्ष ५११६
ईसाई एवं धर्मांधोंको मनचाहा अनुदान बांटनेवाले एवं सिंहस्थ कुंभमेलेके लिए निधि प्रदान न करनेवाले हिंदुद्वेषी कांग्रेसके जनप्रतिनिधियोंको हिंदू राष्ट्रमें कडा दंड दिया जाएगा !
नाशिक – यहां २०१५ में आयोजित सिंहस्थ कुंभमेलेके लिए प्रशासकीय स्तरपर नियोजन आरंभ है । कुंभमेलेके लिए प्रशासनकी ओरसे केंद्रशासनको २ सहस्र ३७८ करोड रुपएका ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है; किंतु अभीतक केंद्रशासनद्वारा निधि आवटिंत नहीं हुई है । अब लोकसभा चुनावके पश्चात केंद्रकी सत्तामें परिवर्तन होनेके कारण ही प्रशासनको नए शासनद्वारा सिंहस्थके लिए अधिक निधि प्राप्त होनेकी अपेक्षा है । (केंद्रमें हिंदुद्वेषी कांग्रेसका शासन होनेके कारण अभीतक हिंदुओंके सिंहस्थ कुंभमेलेके लिए निधि आवंटित नहीं हुई है । यदि इसी स्थानपर ईसाई अथवा धर्मांधोंका उत्सव होता, तो मतोंके लिए कांग्रेस शासनद्वारा उन्हें बिना प्रयास पूरी निधि दी गई होती । परिणामस्वरूप जनताने लोकसभा चुनावमें कांग्रेसको पाठ पढाया है; अतः केंद्रमें यदि नरेंद्र मोदीका शासन आया, तो वे कुंभमेलेके लिए उचित प्रबंध कर हिंदुओंको उज्ज्वल भविष्यके लिए आश्वस्त करें ! – संपादक)
शासनद्वारा प्रशासनको ५०० करोड रुपएकी निधि प्राप्त हुई है । अधिक निधिके लिए केंद्रशासनके पास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है । पुलोआ शासनके कार्यकालमें यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था; किंतु अब भाजपाप्रणीत रोलेआका शासन सत्तामें आनेके कारण जनपद प्रशासनको पुनः प्रयास करने पडेंगे । वर्ष २००३ के सिंहस्थमें केंद्रशासनने १०० करोड एव राज्यशासनने ७५ करोड रुपएकी निधि दी थी । इलाहाबादके कुंभमेलेके लिए १ सहस्र करोड रुपए शासनद्वारा प्राप्त हुए थे । उसी प्रकार नाशिक कुंभमेलेके लिए भी निधि प्राप्त होना अपेक्षित है ।
स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात








