एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित भेंटवार्ता में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री. मनोहरलाल खट्टर ने दादरी में गोमांस को लेकर हुई हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है । उन्होंने कहा की, हमें घटना के पीछे के कारणों को समझना होगा । हमें यह समझना होगा कि किसी ने ऐसा क्यों किया? उन्होंने इस घटना में भीड़ की तुलना उस व्यक्ती से की, जो अपनी मां की हत्या अथवा बहन के साथ छेड़छाड़ होते देखता है और उसका गुस्सा भड़क उठता है ।
खट्टर से पूछा गया कि, क्या लोगों को उनकी पसंद की चीजें खाने-पीने से रोकना संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं है ? इस पर उन्होंने कहा, लोकतंत्र में सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिलती है, परंतु इसकी अपनी सीमाएं हैं । एक व्यक्ती की स्वतंत्रता की सीमा वहीं तक है, जहां तक वह किसी दूसरे को ठेस नहीं पहुंचाता । गोमांस खाना दूसरे समुदाय की भावनाओं को भड़काता है । यहां तक कि संवैधानिक रूप में भी आप ऐसा नहीं कर सकते । संविधान यह कहता है कि आप कुछ भी ऐसा नहीं कर सकते जो मुझे ठेस पहुंचाता हो । मैं कुछ ऐसा नहीं कर सकता, जो आपको ठेस पहुंचाए ।
खट्टर ने यह भी कहा, ऐसा कहीं नहीं लिखा कि मुसलमानों को गोमांस खाना ही होगा । ईसाइयों के लिए भी यह कहीं नहीं कहा गया है कि उनका गोमांस खाना आवश्यक है । मुसलमान इस देश में रह सकते हैं, परंतु उन्हें गोमांस खाना छोड़ना होगा । गाय, गीता और सरस्वती देश के बहुसंख्यक समुदाय के लिए धार्मिक विश्वास के प्रतीक हैं ।
खट्टर की इस भेंट वार्ता पर विवाद आरंभ होने पर उन्होंने कहा की मैने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था । मेरा किसी की भावनाआें को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश नहीं था ।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स








