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भगवान शिव के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्ते में खटास

चैत्र पौर्णिमा, कलियुग वर्ष ५११६


मेलबोर्न : ऑस्ट्रेलिया अगर भगवान शिव की प्रतिमा भारत को नहीं लौटाता है तो दोनों देशों के संबंधों में खटास आ सकती है। यह कहना है आस्ट्रेलिया के एक पूर्व राजनयिक पेरा वेल्स का जो नई दिल्ली में १९९१ में उप उच्चायुक्त रह चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि कैनबरा स्थित राष्ट्रीय गैलरी ने यह प्रतिमा २००८ में ५० लाख डॉलर में खरीदी थी। बाद में पता चला कि यह प्रतिमा भारत के एक मंदिर से चुराई गई थी। वेल्स का कहना है कि ९०० साल पुरानी यह प्रतिमा लौटा देना चाहिए ताकि इसे तमिलनाडु के श्रीपुरनाथन मंदिर में पुन: स्थापित किया जा सके। अगर आर्ट गैलरी ऐसा नहीं करती है तो दोनों देशों के संबंध प्रभावित होंगे। आस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट में संबोधित करते हुए वेल्स ने कहा है कि यह तब और भी जरूरी हो जाएगा, यदि भाजपा सत्ता में आई जो हिन्दुत्व पर अधिक जोर देती है।

कपूर पर मुकदमा

नटराज की यह कांस्य प्रतिमा ऑस्ट्रेलिया की आर्ट गैलरी ने सुभाषष कपूर नामक एक भारतीय आर्ट डीलर से खरीदी थी। कपूर पर भारतीय पुरा महत्व की वस्तुएं तस्करी कर बेचने के आरोप में चेन्नई में मुकदमा चल रहा है। भारत से प्रतिमा लौटाने का अनुरोध करने के बाद वर्तमान में गैलरी से प्रतिमा हटा दी गई है। २००२ से २०११ के बीच ऑस्ट्रेलिया की नेशनल आर्ट गैलरी ने कपूर से २२ वस्तुएं खरीदी थीं जिसके लिए १.१ करोड़ डॉलर मूल्य चुकाया गया था।

स्त्रोत : जागरण

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