
केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा है कि, हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाना भगवाकरण नहीं है। उन्होंने आजतक के कार्यक्रम ‘सीधी बात’ में मोदी सरकार के बारे में किए गए सवाल के जवाब में यह बात कही।
डॉ. महेश शर्मा ने कहा है कि रामायण और महाभारत की पढ़ाई स्कूलों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना को पूरा करने के लिए वे मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी के साथ काम कर रहे हैं।
डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि बाइबिल और कुरान का भी सम्मान होना चाहिए, पर ये गीता व रामायण की तरह भारत की आत्मा के मूल में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक गीता-रामायण की बात है, ये भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक धरोहर हैं। यही वजह है कि इनकी पढ़ाई अनिवार्य होनी चाहिए।
देश में नैतिकता के ह्रास के बारे में केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति राज्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने सांस्कृतिक प्रदूषण के खिलाफ एक तरह से लड़ाई छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि संस्कृति से ही किसी राष्ट्र का सही परिचय मिलता है। अब समय आ गया है कि पश्चिमी संस्कृति के नकारात्मक प्रभाव को दूर किया जाए और अपनी पुरानी संस्कृति को अपनाया जाए।
मीट प्रतिबंध विवाद पर टिप्पणी करते हुए महेश शर्मा ने कहा कि, उनके विचार से नवरात्र के ९ दिनों में भी मांस की बिक्री बंद होनी चाहिए, जब देश में ज्यादातर लोग इससे दूर रहते हैं।
हिंदी के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, इसे स्कूलों में अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि देश के विद्यार्थीयों को जर्मन सीखने की बजाए संस्कृत क्यों नहीं सीखनी चाहिए ? उन्होंने कहा कि अगर जरूरी हो, तो जर्मन सीखें, पर इससे पहले भारतीय भाषाएं भी सीखें।
स्त्रोत : आज तक








