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विश्वासघाती भाजपाको क्षमा नहीं !

चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११५

श्रीराम सेनाके अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिकका भाजपामें प्रवेश करनेके पश्चात कुछ घंटोंके अंदर ही पक्षद्वारा उन्हें हटाया जाना क्रोधजनक था । भाजपावाले कहते हैं, ‘श्री.मुतालिकके भाजपाप्रवेशको विरोध होनेके कारण ही उनकी सदस्यता निरस्त की गई ।’ तब भी ऐसा कहनेके लिए अवसर है कि पक्षद्वारा श्री.मुतालिकका तेजोभंग करने हेतु जानबूझकर इस प्रकारका कृत्य किया गया । क्या एक ही रात्रिमें निश्चित किया गया था श्री.मुतालिकको पक्षमें सम्मिलित करें ? इस विषयमें पक्षांतर्गत बहुत विचार-विमर्श हुआ होगा । श्री. मुतालिक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है । उनके हिंदुत्वके विषयमें प्रखर विचार एवं कार्य सर्वज्ञात है ।

भाजपाके हिंदुत्वका त्याग कर बहुत वर्ष व्यतीत हो चुके है । इसलिए कर्नाटकमें भाजपाके सत्तामें रहते समय श्री.मुतालिकद्वारा किए गए हिंदुनिष्ठ कार्योंसे भाजपावालोंको ‘कष्ट’ हो रहा था । भाजपावाले इतने भोलेभाले भी नहीं हैं कि श्री.मुतालिकके भाजपामें प्रवेश करनेके कारण भाजपाकी सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) प्रतिमाको ठेस लगकर तथाकथित सेक्युलरिज्म (धर्मनिरपेक्षतावादी), समाजवादी एवं हिंदुद्वेषी प्रसारमाध्यमोंका विरोध होगा, यह भी न समझें । ऐसा होते हुए भी बडी-बडी बाताेंके साथ श्री.मुतालिकका पक्षप्रवेशका कार्यक्रम संपन्न हुआ । यह समाचार ज्ञात होते ही प्रसारमाध्यमोंने सदैवकी भांति अपनी कांय-कांय आरंभ की । इसके पश्चात उन्हें पक्षसे तेजीसे हटानेके संदर्भमें पक्षद्वारा सूचित किया गया । यदि श्री.मुतालिकको पक्षसे हटाना ही था, तो पक्षमें लिया ही किसलिए ? भाजपावाले कहते हैं, ‘हायकमांडके कहनेसे उन्हें हटाया गया;’ परंतु ये ‘हायकमांड‘ अर्थात राजनाथ सिंह, नरेंद्र मोदी, संघवाले अथवा अन्य कौन है, यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है ।

भाजपाको देशद्रोही चलते हैं, (पसंद हैं); परंतु देशप्रेमी चुभते हैं !

‘इस समयके चुनावके परिणाम भाजपाके पक्षमें घोषित होंगे ‘ यह बात ध्यानमें आते ही पूर्वमें मोदीको अपशब्द कहनेवाले अब उनकी प्रशंसा करते हुए भाजपाके मित्रपक्ष बन गए हैं । इसमें एक नाम अवश्य रूपसे सामने आता है, वह है, लोकजनशक्ति पक्षके रामविलास पासवान । ‘सिमी’ आतंकवादी संगठनपर प्रतिबंध लगानेपर पासवानने विरोध दर्शाया था । इतना ही नहीं, अपितु पिछले चुनावके अवसरपर मुसलमानोंके मत प्राप्त करने हेतु ओसामा बिन लादेनका गणवेश परिधान किए कलाकारको साथमें लेकर पासवानने बिहारमें प्रसार किया था । जिहादी आतंकवादियोंका समर्थन करनेवाले पासवान समान देशद्रोही भाजपावालोंको पसंद हैं, तो प्रखर राष्ट्रभक्त एवं हिंदुनिष्ठ श्री.मुतालिक पक्षको क्यों पसंद नहीं है ?

इस प्रकरणसे पुनः एक बार दिखाई दिया कि सत्ताप्राप्तिके लिए भाजपाका कितनी तेजीसे अधःपतन चालू है । श्री.मुतालिकद्वारा अनेक बार भाजपाका नकली हिंदुत्वका मुखौटा तार-तारकर फाडा गया है । पक्षप्रवेशके दिखावेका आयोजन कर भाजपावालोंने इस बातका प्रतिशोध लिया, ऐसा ही कहना होगा । तब भी भाजपावालोंको इस हीन कृत्यका परिणाम भविष्यमें भोगना ही पडेगा ।

हिंदुनिष्ठोंके लिए सीख !

श्री.मुतालिकद्वारा किए जानेवाले राष्ट्र एवं धर्मके कार्यके विषयमें हमारे अंतःकरणमें तनिक भी संदेह नहीं है । उनके इस कार्यके विषयमें हमें नितांत आदर है । तब भी हम कहना चाहते हैं कि भाजपामें प्रवेश करना यह श्री.मुतालिककी चूक थी । जिस मोदीप्रेमके कारण श्री.मुतालिकने भाजपामें प्रवेश किया, वे मोदी इस पूरे प्रकरणमें स्तब्ध हैं । श्री.मुतालिक मोदीके प्रेममें बहते गए एवं इस कारण ही उनपर आपत्ति आई ।

इससे पूर्व भी भाजपावालोंने श्री.मुतालिकसे बहुत छल किया है । तब भी श्री.मुतालिकको ‘भाजपावासी‘ होनेकी आवश्यकता क्यों प्रतीत हुई ? क्या अभी भी श्री.मुतालिकको ऐसा प्रतीत होता है कि तत्वहीन एवं राष्ट्रघाती लोगोंको साथ लेकर वास्तवमें मोदी कुछ भव्य दिव्य कार्य कर सकेंगे ? 

‘बुराईमेंसे कुछ अच्छा निष्पन्न होता है’। ऐसा कहते हैं । श्री.मुतालिक यदि भाजपाको सहलाते, तो असंगसे संग होता था। इस घटनाके पश्चात श्री.मुतालिक भाजपाको दूर करेंगे, जिसके कारण वे और उत्साहके साथ राष्ट्र एवं धर्मकार्य कर सकेंगे । हिंदुनिष्ठोंको भी इस घटनासे कुछ सीख लेनी चाहिए । कुछ भोलेभाले हिंदुनिष्ठोंको लगता है कि चुनावके माध्यमसे ‘हिंदु राष्ट्र’की दिशामें अग्रसर होना संभव होगा ।

इस घटनासे ध्यानमें आएगा कि यह दृष्टिकोण कितना गलत है । हिंदु इस भ्रममें न रहें कि चुनाव लडकर अथवा किसी राजनीतिक पक्षके माध्यमसे ‘हिंदु राष्ट्र’ स्थापित करना संभव होगा । ‘हिंदु राष्ट्र’ स्थापित करने हेतु अपार कष्ट उठाने होंगे ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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