फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी, कलियुग वर्ष ५११५
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संसद की एक समिति ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कहा है कि वह उग्रवाद के कारण मजबूरन घाटी छोड़कर गये कश्मीरी पंडितों की दयनीय स्थिति के मद्देनजर उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग पर विचार करे।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला ने भी इसी तरह का नजरिया व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सलाह दी गयी है कि वह कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा दे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कश्मीरी पंडितों के 59, 442 परिवार विस्थापितों के रूप में पंजीकृत हैं। इनमें से 38119 जम्मू में, 19338 दिल्ली में और 1985 देश के अन्य हिस्सों में पंजीकृत हैं।
इन परिवारों को नब्बे के दशक में कश्मीर घाटी छोड़कर जाना पड़ा था। उस समय क्षेत्र में उग्रवाद फैल रहा था और कुछ कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया जा रहा था।
स्त्रोत : live हिन्दुस्तान.com








