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`चीनी` कुछ यूं लगा रहे हैं भारतीयों को `चूना`

माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, कलियुग वर्ष ५११५


इंदौर (मध्य प्रदेश) – चाइना आयटम सस्ते होते हैं, हर तरफ इनकी धूम है। सवाल यह है कि ये उत्पाद इतने सस्ते क्यों हैं? जवाब काफी चौंकाने वाला है। दरअसल चाइना माल पर जमकर टैक्स चोरी हो रही है। मूल कीमत के मुकाबले १० फीसदी तक ही कीमत बताकर कस्टम डयूटी दी जा रही है।

मेड इन चाइना का नाम सुनते ही एक बात जेहन में आती है कि इससे सस्ता कुछ नहीं मिलेगा। साथ ही दूसरी बात आती है वह है कि चले तो सालों, न चले तो बेकार। मगर सस्ते के कारण घर-घर में चाइना आइटम पैठ बना रहे हैं। एलईडी बल्ब से लेकर म्यूजिक प्लेयर, रेडियो, मॉस्किटो बैट और मोबाइल तक ऎसे कई आइटम हैं जो खुले आम बिक रहे हैं।

ये उत्पाद आम लोगों को भले ही सस्ते पड़ रहे हैं, मगर इसके लिए हर दिन देश को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कस्टम डयूटी से बचने के लिए इन आइटम की जो कीमत बताई जाती है वह अविश्वसनीय रूप से इतनी कम होती है कि यकीन ही नहीं होता। कस्टम से पार होते ही उत्पाद के मार्केट में आते ही कीमत १० से लेकर १०० गुना तक बढ़ जाती।

रेवेन्यू इंटेलीजेंस की रिपोर्ट है कि साढ़े तीन हजार से अधिक ऎसे उत्पाद बिक रहे हैं जिन पर जमकर कस्टम चोरी हो रही है। कस्टम डयूटी से बचने के लिए इनकी कीमत मूल कीमत की १ से १० फीसदी तक घोषित कर निर्यात किया जा रहा है।

कस्टम डयूटी चोरी में मोबाइल मार्केट भी पीछे नहीं है। चाइना मेड टैबलेट जो यहां चार-साढ़े चार हजार में बिक रहा है, वह मात्र चार सौ रूपए बताकर निर्यात किया जाता है। इस पर करीब १७ फीसदी कस्टम डयूटी दी जाती है। यानी मात्र ६८ रूपए, जबकि मूल कीमत साढ़े चार हजार के हिसाब से ७६५ रूपए होते हैं। यानी हर टेबलेट पर ९१ फीसदी की डयूटी का नुकसान हो रहा है।

एमपी ३ प्लेयर को  १.८३ में लाकर २३० रूपए में बेचा जाता है। इसी तरह एलईडी टॉर्च को ८ में लाकर ३५० में और एमरजेंसी लाइट को २५ में लाकर १००० रूपए में बेचा जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक आइटम पर करीब २९ फीसदी कस्टम डयूटी है। इसी से समझा जा सकता है किस लेवल पर कस्टम डयूटी की चोरी हो रही है।

स्त्रोत : पत्रिका

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