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आईएसआईएस से भी खतरनाक बन सकता है हिज्ब-उत-तहरीर : रिपोर्ट

फाल्गुन कृष्णपक्ष त्रयोदशी, कलियुग वर्ष ५११६

वॉशिंगटन : कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) बड़े ही शातिर तरीके से दुनिया की नजरों से बचते हुए अपनी विचारधारा फैला रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह आतंकी संगठन आईएसआईएस से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। आतंकी संगठन HuT भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है, क्योंकि पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसका अच्छा-खासा प्रभाव देखने को मिला है।

अमेरिकी ग्लोबल एजुकेशन कम्यूनिटी कलैबरेशन ऑनलाइन के जर्नल सीटीएक्स की रिपोर्ट का कहना है कि यह आतंकी संगठन बेहद शातिर तरीके से ५० से भी ज्यादा देशों में अपनी पहुंच बना चुका है। दुनिया भर में इसके १० लाख से ज्यादा सदस्य हैं, जो कि आईएसआईएस के सदस्यों से कहीं ज्यादा हैं। रिपोर्ट्स के हवाले से जर्नल में लिखा गया है कि हरकत-उत-तहरीर का ‘हरकत-उल-मुहोजिरगनफी’ नाम से एक स्पेशल विंग है, जो अपने काडर को केमिकल और बायो वेपन्स की ट्रेनिंग देता है।

इस हिसाब से इस संगठन को ISIS से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। १९५२ में यरूशलम में गठित और लंदन से ऑपरेट होने वाले इस संगठन की शाखाएं आज दुनिया भर में हैं। साउथ एशिया में पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी इसका अच्छा-खासा प्रभाव दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऐसी जानकारी है कि भारत में भी कुछ हद तक इसकी मौजदूगी है, लेकिन इसका कोई ज्यादा प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा। मगर बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी मुल्कों में इसकी मौजूदगी भारत और ग्लोबल कम्यूनिटी के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।’

अपनी वेबसाइट में HuT ने दावा किया है कि उसने साल २०१० में दिल्ली के बाटला हाउस में इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दिल्ली के इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज़ ऐंड एनालिसिस से जुड़े सुरिंदर कुमार शर्मा द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट कहती है कि इस प्रदर्शन में करीब १० हजार लोग शामिल हुए थे और भारत में दर्ज की गई इस संगठन की यह आखिरी ऐक्टिविटी थी।

सीटीएक्स मैगजीन के ताजा संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ‘आईएसआईएस उग्र और क्रूर तरीके अपनाकर मीडिया का ध्यान खींच रहा है, मगर एचयूटी चुपचाप समर्थन जुटा रहा है।’ बांग्लादेश ने साल २०१० में इस संगठन को बैन कर दिया था, मगर रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके समर्थक लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे ही हाल पाकिस्तान में भी हैं।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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