
सार्वजनिक गणेशोत्सव की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह उत्सव पारंपरिक वाद्यों के साथ और ‘डीजे’ (DJ) मुक्त मनाया जाना चाहिए, ऐसा आह्वान हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने किया है।
इस विषय में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए श्री. सुनील घनवट ने आगे कहा कि, “गणेशोत्सव मूल रूप से एक सात्विक, पवित्र और आनंददायी उत्सव है। परंतु, पिछले कुछ वर्षों से इस मंगलमय उत्सव की पवित्रता भंग होने का चित्र दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से ‘डीजे’ के माध्यम से बजाए जाने वाले अश्लील गाने, उन पर होने वाले फूहड़ नृत्य और बहुत उंची (कर्णकर्कश) आवाज जैसी विकृतियां उत्सव में प्रवेश कर गई हैं। इन सभी प्रकारों के कारण गणेश भक्तों और सामान्य नागरिकों के स्वास्थ्य और शांति का गंभीर प्रश्न निर्माण हो गया है।
🚩 गणेशोत्सव ‘डीजे’मुक्त आणि पारंपरिक पद्धतीने साजरा करा ! – हिंदु जनजागृती समितीचे आवाहन
गणेशोत्सव हा सात्त्विक, पवित्र आणि आनंददायी उत्सव आहे. मात्र, ‘डीजे’च्या कर्णकर्कश आवाजासह अश्लील गाणी, बीभत्स नृत्ये आणि अन्य विकृतींमुळे उत्सवाचे पावित्र्य व मूळ उद्देश बाधित होत आहे.… pic.twitter.com/hw7wq7hckF
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) August 29, 2026
लोकमान्य तिलक जी ने समाज प्रबोधन, लोकजागृति और हिंदू संगठन के महान उद्देश्य से सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। हालांकि, वर्तमान में पश्चिमी संस्कृति के अंधे अनुकरण के कारण यह मूल उद्देश्य कहीं न कहीं खोता जा रहा है और उत्सव का स्वरूप विकृत हो रहा है। हिंदू जनजागृति समिति ने पिछले कई वर्षों से गणेशोत्सव में इस ‘डीजे’ संस्कृति और अन्य अनिष्ट प्रथाओं का निरंतर कड़ा विरोध किया है। इस वर्ष भी ऐसी अपप्रवृत्तियों पर रोक लगनी चाहिए, यह हमारी दृढ़ मांग है।
वर्तमान स्थिति में एक सकारात्मक बात यह है कि कई गणेशोत्सव मंडल ‘डीजे’ मुक्त उत्सव मनाने के लिए स्वयंप्रेरणा से आगे आ रहे हैं। सोलापुर जैसे शहर में ‘सोलापुर पैटर्न’ लागू कर एक अच्छा आदर्श स्थापित किया गया है। भक्तों को सच्चे अर्थों में सात्विक आनंद प्रदान करने, समाज प्रबोधन करने तथा हिंदू संस्कृति और परंपराओं का जतन करने के लिए उत्सव में ‘डीजे’ की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। पारंपरिक वाद्यों की गूंज और हमारी गौरवशाली संस्कृति के अनुसार गणेशोत्सव मनाने पर किसी को भी आपत्ति नहीं होगी।”
इसलिए सभी गणेशोत्सव मंडलों, गणेश भक्तों और नागरिकों को उत्साहपूर्वक आगे आना चाहिए और अपना गणेशोत्सव पारंपरिक वाद्यों के साथ, अत्यंत आनंद और परंपरा के अनुसार ‘डीजे’ मुक्त मनाना चाहिए, ऐसा आह्वान श्री. घनवट ने इस अवसर पर किया।
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