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खाद्य सुरक्षा पर सख्ती दिखाने के लिए केवल हिन्दू त्यौहार ही क्यों ? बकरीद या क्रिसमस पर क्यों नहीं ? – हिन्दू जनजागृति समिति का प्रश्न

पहले राज्य के मुख्यालय में भोजन की गुणवत्ता कब सुधारेगा प्रशासन ?

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने गणेशोत्सव और आगामी त्योहारों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा की सख्ती दिखाते हुए केवल हिंदुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में वितरित होने वाले ‘महाप्रसाद’ और ‘भंडारा’ का विशेष उल्लेख कर कार्रवाई की चेतावनी दी है। खाद्य सुरक्षा के नाम पर केवल हिंदुओं की धार्मिक परंपराओं को लाइसेंस, पंजीकरण और नियमों के जाल में फंसाने का यह प्रयास अत्यंत पक्षपातपूर्ण और प्रशासनिक दोहरे रवैये का उत्तम उदाहरण है। बकरीद, रमजान ईद, इफ्तार पार्टियों, क्रिसमस या गुड फ्राइडे जैसे अन्य धर्मों के त्योहारों के अवसर पर पकाया जाने वाला भोजन और होने वाला सार्वजनिक खाद्य वितरण क्या एफडीए को दिखाई नहीं देता? उस समय खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन होता है या नहीं, इसका स्पष्ट उत्तर प्रशासन को देना चाहिए। क्या अन्य धर्मों के त्योहारों पर भी ये नियम लागू कर कार्रवाई की जाएगी, एफडीए इसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे, यह आह्वान हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री सुनील घनवट ने किया है। समिति ने यह भी कहा है कि भले ही तुकाराम मुंढे अच्छा काम कर रहे हों, लेकिन केवल हिंदुओं के त्योहारों को निशाना बनाने की भूमिका कतई स्वीकार नहीं की जाएगी।

श्री घनवट ने आगे कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, तथा अनुच्छेद 15 के अनुसार सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती। इसके उपरांत केवल हिंदुओं की आस्था से जुड़े अन्नदान और भंडारों पर ही कड़ा रुख अपनाना सरासर पक्षपात है। जनता को भोजन की गुणवत्ता का पाठ पढ़ाने वाले प्रशासन को अपनी स्वयं की इमारतों में फैली गंदगी नजर नहीं आती, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य के मुख्य प्रशासनिक केंद्र ‘मंत्रालय’, ‘विधायक निवास’ और ‘विधान भवन’ के कैंटीन में भोजन के घटिया स्तर को लेकर स्वयं जनप्रतिनिधियों ने कई बार शिकायतें की हैं। कैंटीन प्रबंधन के साथ विधायकों की तीखी झड़प के दृश्य भी महाराष्ट्र ने देखे हैं। सरकारी अस्पतालों और छात्रावासों में मरीजों और छात्रों को दिया जाने वाला भोजन अत्यंत निम्न स्तर का होता है। अपनी सरकारी व्यवस्थाओं में सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने में विफल रहने वाले अधिकारी निष्काम सेवा भाव से तैयार होने वाले ‘महाप्रसाद’ पर सवाल खड़े करते हैं, यह अत्यंत रोषजनक है।

खाद्य सुरक्षा के नियम लागू ही करने हैं, तो उन्हें सभी धर्मों के त्योहारों और आयोजनों में होने वाले खाद्य वितरण पर समान रूप से लागू किया जाए। एफडीए सबसे पहले मंत्रालय, विधायक निवास और सभी सरकारी कैंटीन की गहन जांच कर वहां के भोजन की गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करे। हिंदुओं के मंदिरों, गणेशोत्सव और नवरात्र के सार्वजनिक मंडलों को लाइसेंस के नाम पर परेशान करने का प्रयास न किया जाए तथा अन्नदान की सेवाभावी प्रक्रिया में बाधा न डाली जाए, ऐसा श्री घनवट ने अंत में कहा।

 

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