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मुंबई लोकल में धर्मांतरण के प्रयास का हिंदू जनजागृति समिति ने किया भंडाफोड, दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग

मुख्य सूत्रधारों पर प्रकरण दर्ज करें, अन्यथा जनआंदोलन करेंगे  – हिंदू जनजागृति समिति की रेल प्रशासन को चेतावनी

लोकल में लगाए गए पोस्टर

मुंबई – लोकल ट्रेन में लगाए गए पोस्टरों के माध्यम से ईसाई धर्मप्रचारकों द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण के प्रयासों के विषय में हिंदू जनजागृति समिति ने सीधे राज्य के पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग और मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को विस्तृत निवेदन भेजा है। इसके पीछे के मुख्य सूत्रधारों पर तथा ऐसे विज्ञापन प्रकाशित करने वाले मुद्रणालयों पर तत्काल प्रकरण दर्ज किए जाएं, ऐसी जोरदार मांग हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री सुनील घनवट ने की है। यदि प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनआंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई है।

समिति ने अपने निवेदन में कहा है कि,

1. यात्रियों की भावनात्मक और मानसिक स्थिति का लाभ उठाकर रेल डिब्बों में धर्मांतरण का अत्यंत योजनाबद्ध जाल बिछाया जा रहा है। भावनात्मक शीर्षकों वाले पोस्टर डिब्बों में लगाकर निराश या संकटग्रस्त यात्रियों का वैचारिक रूप से भ्रमित किया जा रहा है।

2.इन विज्ञापनों में वेबसाइटों के पते देकर यात्रियों को धर्मांतरण के जाल में फंसाने की एक बड़ी साजिश उजागर हुई है। रेलवे जैसी सार्वजनिक संपत्ति का इस प्रकार खुला दुरुपयोग अत्यंत आक्रोशजनक है।

3.ईसाई धर्मप्रचारक फादर की ‘चंगाई सभाओं’ के पोस्टर लगाकर केवल प्रार्थना से कैंसर जैसे अनेक गंभीर रोग ठीक करने के अशास्त्रीय दावे किए जा रहे हैं।

4.‘100 प्रतिशत वशीकरण’ तथा ‘प्रेम संबंध ठीक करने वाले बंगाली बाबा’ जैसे फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से यात्रियों की आर्थिक लूट की जा रही है। जादूटोना विरोधी कानून के अनुसार ये गैर-जमानती अपराध हैं; फिर भी रेल प्रशासन केवल मूकदर्शक बना हुआ है।

5.यात्रियों को तत्काल शिकायत करने की सुविधा मिले, इसके लिए रेलवे को ‘व्हॉट्सऐप हेल्पलाइन’ प्रारंभ करनी चाहिए। साथ ही, साधारण वेश में विशेष दल नियुक्त कर ऐसे समाजकंटकों को रंगेहाथ पकड़ना चाहिए। इन विज्ञापनों में दिए गए मोबाइल नंबरों और वेबसाइटों की साइबर पुलिस द्वारा गहन जांच कर उनके पीछे कार्यरत संस्थाओं, फादरों और ढोंगी बाबाओं के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए जाएं। समाजविघातक विज्ञापन छापने वाले मुद्रणालयों का भी पता लगाकर उन पर प्रकरण दर्ज किए जाएं तथा उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएं।

6.पिछले 5 वर्षों में ऐसे अनधिकृत विज्ञापनों के विरुद्ध रेल प्रशासन ने वास्तव में क्या कार्रवाई की है, इसकी श्वेतपत्रिका सार्वजनिक की जाए।

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