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HJS Impact : शासकीय ‘आईटीआई’ में हो रहे कॉर्पोरेट जिहाद की जांच कर त्वरित कार्रवाई करने के मुख्यमंत्री द्वारा आदेश

सोलापुर स्थित शासकीय महिला ‘आईटीआई’ में ‘प्रशासकीय जिहाद’ का प्रकरण

मुंबई – सोलापुर स्थित शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (‘आईटीआई’) में लगभग १५० हिन्दू छात्राओं तथा ९ हिन्दू कर्मचारियों का प्रशासकीय जिहाद एवं संस्थागत प्रताडना के माध्यम से मानसिक, शारीरिक, आर्थिक एवं धार्मिक उत्पीडन होने के प्रकरण की विशेष जांच दल (‘एस.आई.टी.’) के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग शिवसेना की विधान परिषद सदस्या तथा मुख्य सचेतक प्रा. डॉ. मनीषा कायंदे ने मुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की । इस प्रतिवेदन का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोलापुर के पुलिस आयुक्त को संपूर्ण प्रकरण की गहन जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया ।

हिन्दू जनजागृती समिती ने इस संपूर्ण प्रकरण का निरंतर फॉलो-अप किया था । समिती ने उपलब्ध साक्ष्य, पीडित छात्राओं तथा कर्मचारियों की शिकायतों तथा संबंधित प्रपत्रों सहित प्रा. डॉ. मनीषा कायंदे को एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था ।

प्रा. डॉ. मनीषा कायंदे ने मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष भेंट कर उन्हें यह विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा । इस प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि शासकीय महिला आईटीआई की मुस्लिम समूह निदेशक (ग्रुप इंस्ट्रक्टर) श्रीमती रमेजा कंपली की कार्यपद्धति के कारण संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने वाली १५० हिन्दू छात्राओं एवं वहां कार्यरत ९ हिन्दू कर्मचारियों का संस्थागत एवं प्रशासकीय रूप से मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, तथा धार्मिक उत्पीडन किया जा रहा है । उन्हें विभिन्न प्रकार से प्रताडित कर संस्थान से निष्कासित होने के लिए विवश करने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया है ।

प्रतिवेदन में आगे कहा गया है कि संस्थान की छात्राओं की व्यक्तिगत जानकारी स्थानीय मुस्लिम व्यक्तियों को उपलब्ध कराकर उनके माध्यम से छात्राओं को प्रताडित किया जा रहा है । इसके साथ ही, स्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देते समय प्रत्येक से १ से ३ सहस्र रुपये अनधिकृत रूप से वसूल कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है । इन समस्त विषयों के संदर्भ में २७ मार्च २०२६ को कौशल विकास विभाग में शिकायत की गई थी । तत्पश्चात बारंबार अनुवर्तन करने के उपरांत भी कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण पीडितों ने आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी ।

प्रा. डॉ. मनीषा कायंदे ने संबंधित मुस्लिम समूह निदेशक श्रीमती रमेजा कंपली को तत्काल सेवा से पदच्युत कर उनके विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई करने, तथा इस प्रकरण में संलिप्त अन्य सभी व्यक्तियों की जांच कर दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांगे मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं । उस पर मुख्यमंत्री ने उपर्युक्त आदेश दिए ।


20 जून

सोलापुर में कॉर्पोरेट जिहाद : 150 हिन्दू छात्राओं और 9 कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक और धार्मिक उत्पीडन का खुलासा

सोलापुर की शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का मामला

सोलापुर – यहां की शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संस्था की 150 छात्राओं और 9 हिन्दू कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक तथा धार्मिक उत्पीड़न का खुलासा हुआ है। इस संबंध में कर्मचारियों ने 27 मार्च 2026 को कौशल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखित निवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। निवेदन के अनुसार आरोपों की जांच के लिए शासन ने एक समिति गठित की है और इस समिति के दल ने हाल ही में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था के महाविद्यालय का दौरा भी किया।

‘लव जिहाद’ का जाल और छात्राओं का वैचारिक भ्रमितकरण !

संस्था की मुस्लिम समूह-निर्देशिका रमीजा कंपली ने रुखसार शेख नामक महिला की नियमविरुद्ध तरीके से घंटेवारी आधार पर नियुक्ति की। आरोप है कि रुखसार शेख छात्राओं को “प्रेम करो, यदि माता-पिता विवाह की अनुमति न दें तो अपने हाथ काट लो” जैसी अत्यंत विकृत और भड़काऊ बातें सिखाती थी। छात्राओं ने स्वयं मीडिया के सामने रोते हुए इसकी गवाही दी कि महाविद्यालय में प्रेम के पाठ पढ़ाए जाते थे। इसके अतिरिक्त रमीजा ने हिन्दू छात्राओं के नाम विभिन्न लड़कों के साथ जोड़कर उनकी बदनामी की। आरोप है कि जिन लड़कों के साथ हिन्दू छात्राओं के नाम जोड़े गए, उनमें अधिकांश मुस्लिम थे।

इस संदर्भ में ‘सकल हिन्दू समाज’ ने उच्चस्तरीय मुख्य कार्यालयीन जांच समिति के अध्यक्ष को निवेदन सौंपा है।

धार्मिक भेदभाव और हिन्दू छात्राओं का सुनियोजित उत्पीड़न !

संस्था में अत्यंत विषैला धार्मिक वातावरण बनाया गया। पार्लर ट्रेड की एक छात्रा को बुखार आने पर अवकाश चाहिए था, तब उसके कुंकू लगाने पर टिप्पणी करते हुए कहा गया – “तू कुंकू लगाती है, तू बीमार हो ही नहीं सकती”। यह टिप्पणी हिन्दू धर्मविरोधी और अपमानजनक बताई गई है। मासिक धर्म के समय छात्राओं को शौचालय का उपयोग न करना पड़े, इसके लिए “कम पानी पियो” जैसी अमानवीय सलाह दी जाती थी। आरोप है कि रमीजा मुस्लिम छात्राओं को हिन्दू शिक्षकों के विरुद्ध भड़काती थी।

अतिरिक्त मुख्य सचिव को दी गई शिकायत से सामने आए मुख्य आरोप

1. हिन्दू कर्मचारियों को जानबूझकर प्रताड़ित कर पद से हटाया गया और उनकी जगह बिना विज्ञापन या अनुभव के मुस्लिम समुदाय के लोगों की अवैध भर्ती की गई।

2. स्थायी कर्मचारी श्रीमती स्वाती पुकाळे को परेशान कर बाहर किया गया। टी.डब्ल्यू.पी.टी. (टेक्सटाइल वेट प्रोसेसिंग टेक्निशियन) शाखा का पद रिक्त होते ही बिना विज्ञापन और अनुभव के श्रीमती नाहिद शेख की भर्ती की गई। फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेड का अनुभव न होने पर भी अलमास शेख को नियुक्त किया गया।

3. घंटेवारी कर्मचारी तमन्ना शेख 5 महीने तक अनुपस्थित रहने के बावजूद वहां किसी हिन्दू व्यक्ति की नियुक्ति न हो, इसलिए 5 महीने तक छात्राओं को संबंधित विषय पढ़ाया ही नहीं गया और बाद में वहां भी मुस्लिम व्यक्ति की ही भर्ती की गई।

4. प्रवेश प्रमुख होने का लाभ उठाकर रमीजा नामक शिक्षिका हिन्दू लड़कियों को प्रवेश की पूरी जानकारी नहीं देतीं, जबकि मुस्लिम लड़कियों को प्राथमिकता देकर आरिफ शेख की कक्षा में अलग बैठाकर पढ़ाया जाता है।

5. कर्मचारियों के देयकों पर हस्ताक्षर करने के लिए श्रीमती रमीजा द्वारा हर महीने 1,000 रुपये रिश्वत की मांग की जाती है।

6. शासन से प्रात्यक्षिक के लिए कच्चा माल निःशुल्क मिलने के बावजूद रमीजा और अन्य मुस्लिम कर्मचारी छात्राओं पर बाजारभाव से अधिक कीमत पर गणवेश का कपड़ा और सिलाई-सामग्री खरीदने का दबाव डालते थे।

7. सफाई कर्मचारी अर्चना जाधव को हटाकर जाकिर सुलेमान की भर्ती की गई। विरोध के बाद अर्चना जाधव को वापस लिया गया, लेकिन अब उन्हें भीषण मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।

8. बदलापुर की घटना के बाद महाराष्ट्र शासन ने महिला महाविद्यालयों और विद्यालयों में शौचालयों की सफाई के लिए केवल महिला सफाईकर्मियों की नियुक्ति का आदेश दिया है। इसके बावजूद हिन्दू महिला सफाईकर्मी को हटाकर एक मुस्लिम पुरुष को लड़कियों की संस्था में सफाईकर्मी नियुक्त किया गया। यह छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।

9. आरोप है कि श्रीमती रमीजा हर महीने 4 दिन शैक्षणिक कार्य बंद रखकर 150 छात्राओं से झाड़ू-पोछा, झाड़ियों की कटाई जैसे श्रमसाध्य कार्य बलपूर्वक कराती थीं। इसमें कई छात्राओं को चोट लगी, चक्कर आए। जो छात्रा विरोध करती, उसका घर तक पीछा कर धमकाया जाता।

10. तत्कालीन प्राचार्य श्री अमर जाधव ने जब इन अवैध कृत्यों पर रोक लगाने का प्रयास किया, तब रमीजा के पति ने उन्हें जान से मारने और ट्रक चढ़ाने की धमकी दी तथा उन्हें संस्था से बाहर करवा दिया। अब जिन छात्राओं ने आवाज उठाई है, उन्हें भी मुकदमे दर्ज कराने की धमकियां देकर दबाव बनाया जा रहा है।

स्रोत : हिंदी सनातन प्रभात

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