सोलापुर की शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का मामला

सोलापुर – यहां की शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संस्था की 150 छात्राओं और 9 हिन्दू कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक तथा धार्मिक उत्पीड़न का खुलासा हुआ है। इस संबंध में कर्मचारियों ने 27 मार्च 2026 को कौशल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखित निवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। निवेदन के अनुसार आरोपों की जांच के लिए शासन ने एक समिति गठित की है और इस समिति के दल ने हाल ही में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था के महाविद्यालय का दौरा भी किया।
‘लव जिहाद’ का जाल और छात्राओं का वैचारिक भ्रमितकरण !
संस्था की मुस्लिम समूह-निर्देशिका रमीजा कंपली ने रुखसार शेख नामक महिला की नियमविरुद्ध तरीके से घंटेवारी आधार पर नियुक्ति की। आरोप है कि रुखसार शेख छात्राओं को “प्रेम करो, यदि माता-पिता विवाह की अनुमति न दें तो अपने हाथ काट लो” जैसी अत्यंत विकृत और भड़काऊ बातें सिखाती थी। छात्राओं ने स्वयं मीडिया के सामने रोते हुए इसकी गवाही दी कि महाविद्यालय में प्रेम के पाठ पढ़ाए जाते थे। इसके अतिरिक्त रमीजा ने हिन्दू छात्राओं के नाम विभिन्न लड़कों के साथ जोड़कर उनकी बदनामी की। आरोप है कि जिन लड़कों के साथ हिन्दू छात्राओं के नाम जोड़े गए, उनमें अधिकांश मुस्लिम थे।
इस संदर्भ में ‘सकल हिन्दू समाज’ ने उच्चस्तरीय मुख्य कार्यालयीन जांच समिति के अध्यक्ष को निवेदन सौंपा है।
धार्मिक भेदभाव और हिन्दू छात्राओं का सुनियोजित उत्पीड़न !
संस्था में अत्यंत विषैला धार्मिक वातावरण बनाया गया। पार्लर ट्रेड की एक छात्रा को बुखार आने पर अवकाश चाहिए था, तब उसके कुंकू लगाने पर टिप्पणी करते हुए कहा गया – “तू कुंकू लगाती है, तू बीमार हो ही नहीं सकती”। यह टिप्पणी हिन्दू धर्मविरोधी और अपमानजनक बताई गई है। मासिक धर्म के समय छात्राओं को शौचालय का उपयोग न करना पड़े, इसके लिए “कम पानी पियो” जैसी अमानवीय सलाह दी जाती थी। आरोप है कि रमीजा मुस्लिम छात्राओं को हिन्दू शिक्षकों के विरुद्ध भड़काती थी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव को दी गई शिकायत से सामने आए मुख्य आरोप
1. हिन्दू कर्मचारियों को जानबूझकर प्रताड़ित कर पद से हटाया गया और उनकी जगह बिना विज्ञापन या अनुभव के मुस्लिम समुदाय के लोगों की अवैध भर्ती की गई।
2. स्थायी कर्मचारी श्रीमती स्वाती पुकाळे को परेशान कर बाहर किया गया। टी.डब्ल्यू.पी.टी. (टेक्सटाइल वेट प्रोसेसिंग टेक्निशियन) शाखा का पद रिक्त होते ही बिना विज्ञापन और अनुभव के श्रीमती नाहिद शेख की भर्ती की गई। फ्रूट एंड वेजिटेबल ट्रेड का अनुभव न होने पर भी अलमास शेख को नियुक्त किया गया।
3. घंटेवारी कर्मचारी तमन्ना शेख 5 महीने तक अनुपस्थित रहने के बावजूद वहां किसी हिन्दू व्यक्ति की नियुक्ति न हो, इसलिए 5 महीने तक छात्राओं को संबंधित विषय पढ़ाया ही नहीं गया और बाद में वहां भी मुस्लिम व्यक्ति की ही भर्ती की गई।
4. प्रवेश प्रमुख होने का लाभ उठाकर रमीजा नामक शिक्षिका हिन्दू लड़कियों को प्रवेश की पूरी जानकारी नहीं देतीं, जबकि मुस्लिम लड़कियों को प्राथमिकता देकर आरिफ शेख की कक्षा में अलग बैठाकर पढ़ाया जाता है।
5. कर्मचारियों के देयकों पर हस्ताक्षर करने के लिए श्रीमती रमीजा द्वारा हर महीने 1,000 रुपये रिश्वत की मांग की जाती है।
6. शासन से प्रात्यक्षिक के लिए कच्चा माल निःशुल्क मिलने के बावजूद रमीजा और अन्य मुस्लिम कर्मचारी छात्राओं पर बाजारभाव से अधिक कीमत पर गणवेश का कपड़ा और सिलाई-सामग्री खरीदने का दबाव डालते थे।
7. सफाई कर्मचारी अर्चना जाधव को हटाकर जाकिर सुलेमान की भर्ती की गई। विरोध के बाद अर्चना जाधव को वापस लिया गया, लेकिन अब उन्हें भीषण मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।
8. बदलापुर की घटना के बाद महाराष्ट्र शासन ने महिला महाविद्यालयों और विद्यालयों में शौचालयों की सफाई के लिए केवल महिला सफाईकर्मियों की नियुक्ति का आदेश दिया है। इसके बावजूद हिन्दू महिला सफाईकर्मी को हटाकर एक मुस्लिम पुरुष को लड़कियों की संस्था में सफाईकर्मी नियुक्त किया गया। यह छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।
9. आरोप है कि श्रीमती रमीजा हर महीने 4 दिन शैक्षणिक कार्य बंद रखकर 150 छात्राओं से झाड़ू-पोछा, झाड़ियों की कटाई जैसे श्रमसाध्य कार्य बलपूर्वक कराती थीं। इसमें कई छात्राओं को चोट लगी, चक्कर आए। जो छात्रा विरोध करती, उसका घर तक पीछा कर धमकाया जाता।
10. तत्कालीन प्राचार्य श्री अमर जाधव ने जब इन अवैध कृत्यों पर रोक लगाने का प्रयास किया, तब रमीजा के पति ने उन्हें जान से मारने और ट्रक चढ़ाने की धमकी दी तथा उन्हें संस्था से बाहर करवा दिया। अब जिन छात्राओं ने आवाज उठाई है, उन्हें भी मुकदमे दर्ज कराने की धमकियां देकर दबाव बनाया जा रहा है।
स्रोत : हिंदी सनातन प्रभात









