राज्यभर में घंटानाद, महाआरती, हस्ताक्षर अभियान और मुंबई में महाआंदोलन की सरकार को चेतावनी!
जमीनें बचीं, तभी सुरक्षित रहेंगे देवस्थान – मंदिर ट्रस्टियों का दृढ मत

पुणे : ‘‘देवस्थानों की जमीनें बचेंगी, तभी हमारे मंदिर और धार्मिक कार्य सुरक्षित रहेंगे। इसलिए सरकार इन जमीनों का अधिग्रहण करने का प्रयास तुरंत रोके।’’ यह स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग देवस्थान और अष्टविनायक समिति सहित पुणे क्षेत्र के सैकड़ों प्रमुख देवस्थानों ने ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन (प्रारूप) अधिनियम, 2026’ के विरुद्ध पुणे से सीधे संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। इस विवादास्पद प्रस्तावित कानून का कड़ा विरोध करने और सरकार को समय रहते कदम उठाने की चेतावनी देने के लिए ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ के तत्वावधान में पुणे में महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न हुईं।
🚨 Hundreds of major shrines across Maharashtra, including Bhimashankar and the Ashtavinayak temples, have united against the proposed Devasthan Act!
🔔 Statewide Ghantanad, Maha-Aartis, signature campaigns, and a massive protest in Mumbai have been announced.
⛳ “Temples can… pic.twitter.com/9eabBc0hyS
— Sunil Ghanwat 🛕🛕 (@SG_HJS) June 1, 2026
इस कानून के विरोध में अगले 25 दिनों के भीतर लाखों कानूनी आपत्तियां दर्ज कराने के साथ-साथ, राज्यव्यापी हस्ताक्षर अभियान, प्रत्येक मंदिर में महाआरती, आगामी मानसून सत्र के दौरान विधानमंडल पर ‘घंटाबाँद आंदोलन’ और आवश्यकता पड़ने पर मुंबई के आजाद मैदान में ‘महाआंदोलन’ छेड़ने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, जल्द ही ‘राज्य स्तरीय देवस्थान भूमि संरक्षक परिषद’ आयोजित करने का भी एकमत से संकल्प लिया गया है।

पुणे के श्री सिद्धिविनायक मंदिर (सारसबाग), खंडोबा मंदिर (आकुर्डी) और श्री सियाराम मंदिर, गौशाला (हड़पसर) में आयोजित इन बैठकों में वरिष्ठ अधिवक्ता एस. के. जैन ने स्पष्ट किया कि देवस्थानों का अस्तित्व बनाए रखने के लिए उनकी जमीनों का सुरक्षित रहना अत्यंत आवश्यक है। पूर्व चैरिटी कमिश्नर दिलीप देशमुख ने इस कानून के पीछे सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त करते हुए ट्रस्टियों से अधिक से अधिक संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने का आह्वान किया। वहीं, रांजनगांव महागणपति देवस्थान के ट्रस्टी डॉ. तुषार पाटिल पाचुंदकर ने अष्टविनायक मंदिरों की ओर से इस कानून का तीव्र विरोध दर्ज कराया, जबकि भीमाशंकर देवस्थान के अधिवक्ता सुरेश कौदरे ने सेवादारों के अधिकारों के संरक्षण की मांग की। मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने इस लड़ाई को मंदिरों की अस्मिता से जुड़ा बताते हुए चेतावनी दी कि 2 जून को संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) को ज्ञापन सौंपकर राज्यव्यापी आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

इस आंदोलन की रणनीति तैयार करने और प्रत्येक मंदिर में जागरूकता बोर्ड लगाकर एक जन-आंदोलन खड़ा करने के लिए राज्यभर के प्रमुख ट्रस्टी एकजुट हुए हैं। इन बैठकों में भीमाशंकर देवस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष मधुकर गवांडे, प्रसाद गवांडे, ग्रामदेवता कसबा गणपति की संगीताताई ठकार, भवानीपेठ पालकी मंदिर के प्रमोद बेंगरूट, कानिफनाथ मंदिर के ज्ञानोबा व सुरेश फड़तरे, श्रीमंत सरदार खासगीवाले लिमये, निलेश वाळावे (शिरवल), निवृत्ति बडदे (कोड़ित), अखिल मंडई गणेशोत्सव मंडल के श्री वांजले, जेजुरी मार्तंड देवस्थान व दगडूशेठ दत्त मंदिर के अधिवक्ता श्री थोरवे, आकुर्डी खंडोबा देवस्थान के अध्यक्ष विठ्ठल कालभोर व उपाध्यक्ष पंढरीनाथ कालभोर, चतुःश्रृंगी देवस्थान के ट्रस्टी और अधिवक्ता वृषाली दातार सहित कानूनी और धार्मिक क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित थे।








