मंदिरों पर होने वाले आघातों को रोकने के लिए मंदिरों का संगठन आवश्यक है – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृति समिति

म्हार्दोल (गोवा) – हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने कहा कि मंदिरों के प्रतिनिधियों और हिंदुओं को संगठित होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गोवा में पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति देकर मंदिरों और देवताओं की रक्षा की थी। आज भी ऐसी चुनौतियाँ फिर से उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए मंदिरों के विश्वस्तों और भक्तों को सजग होकर संगठित होना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के संभल स्थित श्री हरिहर मंदिर में हिंदुओं के प्रवेश का विषय न्यायालय में लंबित है तथा पश्चिम बंगाल के एक दुर्गा मंदिर को 15 वर्षों बाद हाल ही में खोला गया है। स्वतंत्र भारत में भी यदि मंदिरों की ऐसी स्थिति हो सकती है, तो भविष्य में अन्य राज्यों, जिनमें गोवा भी शामिल है, में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यह विचार उन्होंने गोवा के श्री महालसा नारायणी मंदिर, म्हार्दोल में आयोजित द्वितीय राज्यस्तरीय मंदिर न्यास परिषद में व्यक्त किए। यह परिषद 31 मई को प्रातः 10 बजे से सायं 6:30 बजे तक आयोजित की गई थी।
मंदिरों की शक्ति को समझना आवश्यक

रमेश शिंदे ने कहा कि मंदिरों के विश्वस्तों और महाजनों को यह भावना रखनी चाहिए कि वे “ईश्वर का राज्य” चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब तक करोड़ों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और मंदिर को विशाल आर्थिक आय प्राप्त हुई है। इससे मंदिरों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति स्पष्ट होती है।
उन्होंने महाराष्ट्र में प्रस्तावित “महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम-2026” का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मंदिरों की भूमि प्रभावित हो सकती है। यदि भविष्य में ऐसे कानून गोवा में भी लाए गए, तो मंदिर प्रतिनिधियों को भक्तों का संगठन कर उनका विरोध करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उद्घाटन सत्र की प्रमुख बातें
परिषद का शुभारंभ दीपप्रज्ज्वलन और शंखनाद के साथ हुआ। इस अवसर पर सद्गुरु नंदकुमार जाधव, ह.भ.प. सुहास बुवा वझे, गोमंतक मंदिर महासंघ के सचिव जयेश थळी, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे, श्री महालसा नारायणी देवस्थान के अध्यक्ष प्रेमानंद कामत उपस्थित रहे।
वेदमंत्रों का उच्चारण पुरोहित दामोदर वझे द्वारा किया गया।
विभिन्न वक्ताओं का मार्गदर्शन
ह.भ.प. सुहास बुवा वझे – भक्तों को मंदिरों से जोड़ने के प्रयास
सद्गुरु नंदकुमार जाधव – मंदिर ट्रस्टियों के लिए कालानुसार साधना
रमेश शिंदे – हिंदू संगठन की दृष्टि से मंदिरों का संगठन
शुभा सावंत (सनातन संस्था) – धर्मप्रसार के केंद्र के रूप में मंदिर
परिषद में पारित प्रमुख प्रस्ताव
- मंदिरों के 100 मीटर क्षेत्र में मांस और मदिरा बिक्री पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए।
- मदिरालयों को हिंदू देवी-देवताओं के नाम देने पर रोक लगाने हेतु कानून बनाया जाए।
- पुर्तगालियों द्वारा नष्ट किए गए मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए सरकार पहल करे।
- गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव का दर्जा दिया जाए।
- धर्मांतरण रोकने के लिए धर्मांतरण-विरोधी कानून बनाया जाए।
- मंदिरों के जत्रा (मेला) उत्सवों में अन्य धर्मों के स्टॉल लगाने पर प्रतिबंध हो।
- मंदिर समितियों में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए।
- मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने हेतु वस्त्रसंहिता लागू की जाए।
- धार्मिक उत्सवों में धर्मविरोधी या अनुचित कार्यक्रमों का आयोजन न किया जाए।
‘हिंदू युवा शक्ति’ संगठन का सम्मान
म्हापसा स्थित हिंदू युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं का परिषद में सम्मान किया गया। संगठन द्वारा देव, देश और धर्म रक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।
सायंकालीन सत्र
सायंकालीन सत्र में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संतोष रिवणकर और सुनील सिरसाट ने मंदिर ट्रस्टियों को आने वाली कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों पर मार्गदर्शन दिया। इस दौरान मंदिर प्रबंधन, धर्मशिक्षा और संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
परिषद की प्रमुख उपलब्धियां
परिषद के परिणामस्वरूप:
- 39 मंदिरों ने वस्त्रसंहिता लागू करने का निर्णय लिया।
- 29 मंदिरों ने तालुका स्तर पर बैठकें आयोजित करने का निश्चय किया।
- 30 मंदिरों में धर्मशिक्षा संबंधी फलक लगाने का निर्णय हुआ।
- 26 मंदिरों में धर्मजागरण व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
- 28 मंदिरों में धर्मशिक्षा वर्ग शुरू किए जाएंगे।
- 21 मंदिरों में सामूहिक आरती प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।
सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने मंदिरों के 100 मीटर क्षेत्र में मांस और मदिरा बिक्री बंद कराने के लिए प्रयास करने का संकल्प लिया।








