वक्फ को छोडकर केवल हिंदू मंदिरों की इनामी जमीनों का अधिग्रहण क्यों? – मंदिर विश्वस्तों का आक्रोशपूर्ण सवाल

मुंबई : मुसलमानों के वक्फ बोर्ड को इस कानून से पूरी तरह छूट देना और केवल हिंदू देवस्थानों की लगभग साढ़े चार लाख हेक्टेयर इनामी भूमि अपने कब्जे में लेना, यह सरकार की नीति हिंदुओं की धार्मिक संपत्तियों पर एकतरफा प्रहार है। वक्फ को छोड़कर केवल हिंदू मंदिरों की जमीनों का ही अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है?” ऐसा आक्रोशपूर्ण सवाल उठाते हुए राज्यभर के मंदिर विश्वस्तों ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। महाराष्ट्र सरकार की ओर से प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन अधिनियम 2026’ के मसौदे का तीव्र विरोध करने के लिए मुंबई के स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक में 25 मई को ‘देवस्थान भूमि राज्यस्तरीय संरक्षण परिषद’ आयोजित की गई। इस परिषद में हिंदू मंदिरों की बहुमूल्य भूमि छीनने वाले इस प्रस्तावित कानून को सरकार द्वारा बिना शर्त और तत्काल वापस लिया जाए, ऐसा सार्वजनिक प्रस्ताव उपस्थित मंदिर विश्वस्त, विधि विशेषज्ञों और हिंदू संगठनों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया।
🏛️ देवस्थान भूमी संरक्षण राज्यस्तरीय परिषद मुंबई येथे संपन्न झाली.
Live कार्यक्रम लिंक : https://t.co/NAbfXfJ153
🛕 देवस्थान इनाम जमिनींचे (इनाम वर्ग-३) भूमाफियांपासून आणि बेकायदेशीर हस्तांतरणापासून संरक्षण करण्यासाठी 'देवस्थान भूमी संरक्षण परिषदे'चे आयोजन करण्यात आले होते.… pic.twitter.com/s6jw4yC9Iq
— Sunil Ghanwat 🛕🛕 (@SG_HJS) May 26, 2026
इस अवसर पर प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से यह भी जोरदार मांग की गई कि मंदिरों की जमीनों पर नजर रखने के बजाय राज्य के देवस्थानों की मूल और गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए ईमानदारी से पहल की जाए। आज राज्य के हजारों ग्रामीण और ऐतिहासिक मंदिरों की स्थिति अत्यंत दयनीय है।
अनेक मंदिरों के पुजारी अत्यंत कम आय पर अथवा केवल श्रद्धा के आधार पर भगवान की दैनिक पूजा-अर्चना कर रहे हैं, इसलिए ऐसे पुजारियों के वेतन का प्रश्न सरकार को गंभीरता से हल करना चाहिए। इसी प्रकार राज्य के प्राचीन और जर्जर मंदिरों का पुनरुद्धार करना, उनके जीर्णोद्धार हेतु विशेष निधि देना तथा आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर मंदिरों को दैनिक व्यवस्थापन के लिए सरकारी स्तर पर ठोस आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है। इन मूल कर्तव्यों को छोड़कर सरकार साढ़े चार लाख हेक्टेयर भूमि हड़पने का प्रयास कर रही है, ऐसा सीधा आरोप मंदिर विश्वस्तों ने लगाया।

इस परिषद में उपस्थित वक्ताओं ने सरकार की भूमिका पर कड़ी आलोचना की। यदि वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए वक्फ बोर्ड कार्य कर सकता है, तो हिंदू मंदिरों की रक्षा के लिए ‘सनातन बोर्ड’ की स्थापना क्यों नहीं की जाती, ऐसा तीखा प्रश्न महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने उठाया। मस्जिदों और चर्चों की संपत्ति उनके धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग की जाती है, किंतु हिंदू मंदिरों के धन पर राजनेता डाका डाल रहे हैं और मंदिरों की व्यवस्थित लूट चल रही है, ऐसी जोरदार आलोचना विधि विशेषज्ञों ने की। वक्फ बोर्ड की भूमि पर हुए अतिक्रमण सरकारी खर्च से हटाए जाते हैं, तो हिंदू मंदिरों के मामले में यह न्याय क्यों नहीं दिया जाता, ऐसा सवाल उठाते हुए वक्फ संपत्तियों की तरह ही हिंदू मंदिरों की संपत्तियों के लिए भी तत्काल ‘एस्टेट ऑफिसर’ नियुक्त किए जाएं, ऐसी मांग की गई। देवस्थान की भूमि केवल और केवल भगवान की संपत्ति है तथा मंदिरों में आने वाले अर्पण का उपयोग केवल हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए ही होना चाहिए, इस भूमिका पर सभी मंदिर विश्वस्त दृढ़ रहे।
इस अवसर पर मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष श्री रणजीत सावरकर, हिंदू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, राष्ट्रीय सचिव एवं वरिष्ठ विधिज्ञ संजीव पुनालेकर, मुंबई उच्च न्यायालय की अधिवक्ता सिद्धविद्या तथा महाड स्थित श्री अष्टविनायक क्षेत्र श्री गणपति संस्थान की कार्याध्यक्ष अधिवक्ता (श्रीमती) मोहिनी वैद्य ने संबोधित किया।








