संत गोराकुंभार का एकवचन में उल्लेख !

पुणे – ‘अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के श्याम मानव ने एक बार फिर हिंदू धर्मश्रद्धा और संतों के विषय में आपत्तिजनक वक्तव्य किए हैं। यहां टिलक स्मारक मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कुछ न्यायमूर्तियों तथा उच्चशिक्षित वर्ग की महिलाओं के तथाकथित शोषण की कहानियां सुनाते हुए हिंदुओं के श्रद्धास्थलों तथा वारकरी संप्रदाय के संतों का अपमान किया। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी आरोप लगाते हुए उनके प्रति विरोध व्यक्त किया। ‘खरात जैसे ढोंगी बाबा के जाल में महिलाएं क्यों फंसती हैं ?’ इस विषय पर आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस के विकास लवांडे तथा अन्य कुछ व्यक्ति उपस्थित थे। मानव ने अपने भाषण में पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री, लाम्बे महाराज तथा गुलाब महाराज पर भी टीका की।
स्वयं को प्राध्यापक कहने वाले श्याम मानव के विवादास्पद वक्तव्य
१. श्रद्धा को व्यवहार में लाने के लिए सबसे पहले चिलया बाल की कथा का उदाहरण दिया जाता है। वह कुम्हार मिट्टी रौंद रहा था और नामस्मरण में मग्न था। ‘उसका पुत्र मिट्टी में दबकर मर गया, फिर भी वह भक्तिमार्ग में तल्लीन रहा। इसे श्रद्धा कहते हैं’, ऐसा शोषण करने वाले लोगों द्वारा बताया जाता है।
२. ‘पार्वतीतत्त्व जागृत करना’, ‘क्षमा देना’, ‘शुद्धिकरण करना’ जैसे शब्द केवल महिलाओं के शोषण के लिए उपयोग किए जाते हैं। संसार में किसी पर भी दैवी शक्ति प्रसन्न नहीं होती और न ही ईश्वर किसी पर विशेष कृपा करता है। (संतों को चमत्कार सिद्ध करने की चुनौती देकर पीछे हटने वाले श्याम मानव ईश्वरकृपा क्या समझेंगे ? – संपादक)
३. मुस्लिम तांत्रिक हिंदू महिलाओं का शोषण करते हैं। ‘हलाला’ में भी बड़े स्तर पर शोषण हुआ है। ईसाई समुदाय में भी ‘नन’ बनी महिलाओं के शारीरिक शोषण के विषय में मैंने पढ़ा है। (मौलवियों द्वारा किए गए अत्याचारों के विरुद्ध श्याम मानव ने कोई कार्य किया हो, ऐसा सुनने में नहीं आया। ईसाई पादरियों के अत्याचारों पर भी वे केवल ‘पढ़ा है’ ऐसा कहते हैं। ऐसे वक्तव्यों से यह कहना गलत नहीं होगा कि तथाकथित अंधश्रद्धा निर्मूलन करते-करते वे हिंदूद्वेष से ग्रस्त हो गए हैं। – संपादक)
४. “एकनाथ शिंदे गौहत्ती जाकर बलि देने का कार्य करते हैं। यदि वे बलि आदि में विश्वास रखते हैं, तो क्या वे अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून का समर्थन करेंगे ?”, ऐसा मैंने अजित पवार से कहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जादूटोना विरोधी कानून को व्यवहार में लागू ही नहीं करना चाहते, इसलिए वे सहायता नहीं करते।








