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फ्रान्सिस जेवियर द्वारा इन्क्विजिशन की मांग करनेवाला 16 मई का दिन ‘काला दिवस’ घोषित करें – ‘हिंदू एकता मंच’ की मांग

पहली पंक्ति में बाएं से सर्वश्री सत्यविजय नाईक, जयेश थळी, नितीन फळदेसाई, सुजन नाईक तथा पीछे बाएं से अभय सामंत एवं दिनीन पेडणेकर

पणजी – 16 मई 1546 का दिन गोवा के इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक और काले अध्याय की शुरुआत करने वाला दिन माना जाता है। इसी दिन फ्रान्सिस ज़ेवियर ने पुर्तगाल के राजा जॉन तृतीय को पत्र लिखकर गोवा में इन्क्विज़िशन (धर्मन्यायालय) स्थापित करने की मांग की थी। इस पृष्ठभूमि में गोवा सरकार 16 मई को राज्य में ‘काला दिवस’ घोषित करे तथा गोवा के राष्ट्रभक्त नागरिक भी इस मांग का समर्थन करें, ऐसी मांग ‘हिंदू एकता मंच’ ने 13 मई की सायंकाल यहां आज़ाद मैदान में आयोजित पत्रकार परिषद में की।

इस पत्रकार परिषद में हिंदू एकता मंच के सर्वश्री नितीन फळदेसाई, सत्यविजय नाईक, जयेश थळी, सुजन नाईक, अभय सामंत, दिनीन पेडणेकर आदि उपस्थित थे।

पत्रकार परिषद में मंच के पदाधिकारियों ने आगे बताया कि, इतिहास में उपलब्ध दस्तावेज तथा शोध के अनुसार गोवा इन्क्विज़िशन के काल में हजारों हिंदुओं पर धार्मिक अत्याचार किए गए। अनेक मंदिरों को ध्वस्त किया गया। हिंदुओं की धार्मिक परंपराओं पर प्रतिबंध लगाए गए तथा जबरन धर्मांतरण करवाए गए। इतिहासकारों ने भी अपने लेखन में उस समय के अत्याचारों का विस्तृत उल्लेख किया है।

विशेष रूप से इतिहासकार अनंत काकबा प्रियोळकर ने अपनी पुस्तक ‘द इन्क्विज़िशन’ में इन्क्विज़िशन के दौरान दी जाने वाली अमानवीय सजा तथा धार्मिक उत्पीडन का विस्तार से वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त फ्रांसीसी चिकित्सक एवं यात्री चार्ल्स डेलोन ने स्वयं गोवा इन्क्विज़िशन का अनुभव किया था तथा अपने लेखन में उस काल के अत्याचारों का वर्णन किया है।

इतिहास को दबाकर समाज में वास्तविक सौहार्द निर्माण नहीं किया जा सकता। सत्य इतिहास को स्वीकार करना और उसे आने वाली पीढियों तक पहुंचाना ही वास्तविक लोकतंत्र और न्याय की आधारशिला है।

‘हिंदू एकता मंच, गोवा’ द्वारा की गई मांगें

  • 16 मई को ‘गोवा के इतिहास का काला दिवस’ के रूप में आधिकारिक घोषणा की जाए।
  • गोवा इन्क्विज़िशन के सत्य इतिहास को विद्यालय एवं महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए।
  • गोवा में ध्वस्त किए गए हिंदू मंदिरों तथा पीड़ित हिंदू समाज का इतिहास सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाए।
  • गोवा में ‘गोवा इन्क्विज़िशन संग्रहालय’ की स्थापना की जाए।
  • पोप द्वारा इन्क्विज़िशन के विषय में गोमंतकीय हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी जाए।
  • 16 मई के दिन सभी राष्ट्रभक्त नागरिक काली पट्टी बांधकर अथवा काले वस्त्र धारण कर इस घटना का निषेध करें।
  • सभी राष्ट्रभक्त नागरिक अपने सामाजिक माध्यमों के ‘डीपी’ (डिस्प्ले पिक्चर) को काले रंग का रखकर इस ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाएं।
  • सभी राष्ट्रभक्त नागरिक सामाजिक माध्यमों के माध्यम से गोवा इन्क्विज़िशन का सत्य इतिहास जनसामान्य तक पहुंचाएं।

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