सी-कैथेड्रल चर्च से शुरुआत करने की मांग

पणजी – ‘हात कातरो खांब प्रकरण के संबंध में कोई प्रमाण नहीं हैं, निर्णय प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए’, ऐसा बयान विधायक कार्लुस फेरेरा ने दिया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू रक्षा महाआघाड़ी ने स्पष्ट और ठोस भूमिका रखी है। यदि निर्णय वास्तव में प्रमाणों के आधार पर लेना है, तो जहां संभावित प्रमाण होने का दावा किया जाता है, वहां वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन करना आवश्यक है, ऐसा महाआघाड़ी ने स्पष्ट किया है।
हिंदू रक्षा महाआघाड़ी के राज्य सह-समन्वयक श्री नितीन फळदेसाई ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘हात कातरो खांब के संदर्भ में प्रमाण गोवा के पुराने चर्चों के नीचे होने की संभावना व्यक्त की जाती है। कुछ वर्ष पहले पूर्व पुरातत्व विभाग प्रमुख के.के. मोहम्मद ने इस संदर्भ में प्रयास किए थे; लेकिन उस समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उस प्रक्रिया को रोक दिया था। इसलिए ‘प्रमाण नहीं हैं’ ऐसा सामान्य रूप से कहने के बजाय वैज्ञानिक जांच करके वास्तविक स्थिति सामने लाना आवश्यक है। इसी संदर्भ में संभावित उत्खनन प्रक्रिया की शुरुआत सी-कैथेड्रल चर्च परिसर और ‘पालास द इन्क्विज़िशन’ के स्थान से की जानी चाहिए, ऐसी मांग हिंदू रक्षा महाआघाड़ी ने की है।’’
पुरातत्व विभाग, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में पारदर्शी तरीके से उत्खनन किया जाए तो सत्य सामने आ सकता है और चल रहे विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, ऐसा भी महाआघाड़ी ने कहा।
हिंदू रक्षा महाआघाड़ी की प्रमुख मांगें:
- संभावित प्रमाण वाले चर्च परिसरों में वैज्ञानिक उत्खनन की अनुमति दी जाए।
- तकनीकी विशेषज्ञों की समिति बनाकर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए।
- सी-कैथेड्रल से उत्खनन की शुरुआत की जाए।
- संपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक कर अंतिम निर्णय प्रमाणों के आधार पर लिया जाए।
यदि प्रमाणों के आधार पर निर्णय लेने की बात की जा रही है, तो उत्खनन की अनुमति देना ही सबसे उचित मार्ग है, ऐसा नितीन फळदेसाई ने स्पष्ट किया। सत्य को सामने लाने के लिए वैज्ञानिक जांच आवश्यक है और इससे जनता में चल रही भ्रम की स्थिति दूर करने में मदद मिलेगी, ऐसा भी महाआघाड़ी ने कहा।








