Menu Close

रामायण के विषय में आपत्तिजनक वक्तव्य देनेवाले अभिनेता प्रकाश राज के विरुद्ध आपराधिक अभियोग प्रविष्ट

नई दिल्ली – अभिनेता प्रकाश राज के विरुद्ध दिल्ली पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रभु श्रीराम तथा पवित्र हिंदू महाकाव्य रामायण का उपहास कर हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

केरल लिटरेचर फेस्टिवल का एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ, जिसमें वे रामायण से संबंधित एक काल्पनिक कथा का वर्णन करते दिखाई देते हैं, जिसे उन्होंने बालकों द्वारा रचित बताया।

अपने कथन में उन्होंने दर्शाया कि दक्षिण की ओर यात्रा करते समय प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण एक खेत में पहुँचते हैं तथा वहाँ के फल ग्रहण करते हैं। उन्होंने रावण एवं शूर्पणखा को उस खेत का स्वामी बताया, जो फल के मूल्य की मांग करते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी उपहास किया कि श्रीराम लक्ष्मण को “लकी” कहकर संबोधित करते हैं।

उन्होंने आधुनिक कर-प्रणाली ‘GST’ का भी उल्लेख करते हुए व्यंग्य किया कि शूर्पणखा ने फल के लिए 2000 डॉलर (जीएसटी सहित) की मांग की, जबकि रावण ने 20 प्रतिशत की छूट देने का प्रस्ताव रखा।

आगे उन्होंने कहा कि जब श्रीराम और लक्ष्मण ने धनाभाव व्यक्त किया, तब रावण ने उन्हें बीज बोकर वृक्ष उगाने का कार्य करने को कहा। इस प्रसंग को उत्तर एवं दक्षिण भारत के संदर्भ में हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।

अपने वक्तव्य में उन्होंने उत्तर-दक्षिण भेद का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि उत्तर भारत के लोग दक्षिण पर हिंदी भाषा अथवा आहार संबंधी विषयों (जैसे गोमांस-भक्षण) में हस्तक्षेप न करें।

अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा शिकायत दर्ज

अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने इन वक्तव्यों को धार्मिक भावनाओं के लिए आहतकारी बताते हुए दिल्ली पुलिस के दक्षिण जिला साइबर प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सामाजिक माध्यम ‘X’ पर भी सूचित किया कि उन्होंने भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की मांग की है।

प्रकाश राज के वक्तव्यों के पश्चात व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला है। अनेक लोगों ने इसे प्रभु श्रीराम का उपहास, भारत की पवित्र परंपरा का विकृतिकरण तथा क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया है। सामाजिक माध्यमों पर कुछ व्यक्तियों ने इसे “हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति” भी कहा है तथा उनकी आगामी फिल्मों ‘दृश्यम 3’ और ‘वाराणसी’ के बहिष्कार की मांग की है।

यह विवाद पुनः इस विषय पर विमर्श को उत्पन्न करता है कि कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान के मध्य संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।

Read more on Anti Hindus

Latest News