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मंदिरों में ‘सशुल्क दर्शन सेवा’ सुविधा बंद करें – मंदिर महासंघ की अनेक स्थानोंपर ज्ञापन से मांग

बत्तीसशिराळा (जिला सांगली)

‘पेड दर्शन’ बंद करो, देवस्थान बचाओ– बत्तीसशिराळा में ज्ञापन

तहसीलदार शैलजा खोत को ज्ञापन सौंपते हुए हिंदुत्वनिष्ठ

नाशिक, तुळजापूर सहित राज्य के सभी सरकारीकरण किए गए मंदिरों में ‘सशुल्क दर्शन सेवा’ (पेड दर्शन) सुविधा बंद की जाए, इस मांग का ज्ञापन मंदिर महासंघ की ओर से बत्तीसशिराळा में तहसीलदार शैलजा खोत को सौंपा गया। इस अवसर पर कोल्हापुर जिला मंदिर महासंघ के समन्वयक श्री. प्रसाद कुलकर्णी, धर्मप्रेमी श्री. अशोक मस्कर तथा सर्वश्री प्रवीण पाटील, शरद नायकवडी, बजरंग कुंभार, अजित कुंभार, जितेंद्र पंडित, प्रवीण पाटील, धोंडिराम मुळीक, संतोष बांदिवडेकर आदि उपस्थित थे।

इस अवसर पर की गई अन्य मांगें

१. कॉ. गोविंद पानसरे लिखित ‘शिवाजी कौन था ?’ इस पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।

२. बहुराष्ट्रीय कंपनियों में चल रहे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और धार्मिक दबाव के विरोध में कठोर कार्रवाई की जाए।


16 अप्रैल

भक्तों की लूट के खिलाफ मंदिर महासंघ ने उठाई आवाज: ‘पेड दर्शन’ बंद करो, देवस्थान बचाओ!

देवस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां न हों – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संगठक, मंदिर महासंघ

Representational Image

त्र्यंबकेश्वर (नासिक) : ज्योतिर्लिंग मंदिर संस्थान में भक्तों की आर्थिक लूट के मामले में शरद पवार गुट के प्रदेश युवक कार्याध्यक्ष और मंदिर संस्थान के ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलग सहित गोटीराम मनाजी पेहरे और अभिषेक कडलग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यहां 200 रुपये का आधिकारिक पास होने के उपरांत, 10 मिनट में दर्शन का लालच देकर भक्तों से 3 से 12 हजार रुपये मांगे जाने का मामला सामने आया है। इसी तरह का प्रकार तुलजापुर के श्री तुलजाभवानी मंदिर में भी हो रहा है, जहां २०० रुपये का ‘पास’ देकर विशेष दर्शन दिया जाता है। नवरात्रि के दौरान यही पास 300, 500 और 1000 रुपये तक महंगा कर दिया जाता है। यहाँ भी अतिरिक्त शुल्क लेकर दर्शन कराने की कई शिकायतें भक्तों द्वारा की गई हैं।

वास्तव में, ‘सशुल्क दर्शन सेवा’ (Paid Darshan) की अवधारणा ही गलत है, क्योंकि इससे भक्तों के बीच भेदभाव की भावना पैदा होती है। दूर-दराज से आने वाले जिन भक्तों के पास पैसे नहीं हैं, वे क्या करें? धन के अभाव में दर्शन से वंचित करना उनकी श्रद्धा का अपमान है और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। ईश्वर की दृष्टि में अमीर-गरीब सब समान हैं, इसलिए दर्शन की पद्धति भी सबके लिए समान होनी चाहिए। क्या मंदिर केवल आय बढ़ाने के लिए कोई व्यावसायिक प्रतिष्ठान या दुकान है? साथ ही, ऐसे पासों की कालाबाजारी की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। इसलिए, नासिक और तुलजापुर सहित राज्य के सभी सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में ‘पेड दर्शन’ सुविधा तुरंत बंद की जानी चाहिए, ऐसी मांग मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने की है।

देवस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियां बंद करें !

जब मंदिर सरकार या राजनीतिक नियुक्तियों वाली समितियों के नियंत्रण में जाते हैं, तो वहां भक्ति के बजाय व्यावसायिकता हावी हो जाती है। त्र्यंबकेश्वर की यह घटना मंदिर के सरकारीकरण का ही दुष्परिणाम है। ‘अतिथि देवो भव’ मानने वाली भूमि में भक्तों को लूटने के लिए स्वयं ट्रस्टियों द्वारा ही तंत्र चलाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस ‘पेड’ दर्शन मामले की गहन जांच होनी चाहिए और इसमें अन्य कौन शामिल है, इसका पता लगाया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, देवस्थानों में ट्रस्टी के रूप में किसी भी राजनीतिक दल के पदाधिकारी के बजाय एक ‘सच्चे भक्त’ की नियुक्ति होनी आवश्यक है। मंदिर महासंघ मांग करता है कि देवस्थानों के नियमों में इस संबंध में उचित संशोधन किया जाए।

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