प्रशासन की उदासीनता का कड़ा विरोध!
प्रशासन की ढिलाई के चलते चिपळूण ‘स्मार्ट सिटी’ नहीं, अपितु ‘स्क्रैप सिटी’ बनने की ओर!

चिपळूण – चिपळूण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते अवैध कबाड़ व्यवसाय न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। सर्वेक्षण में इन्हें ‘अवैध’ घोषित किए जाने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों में कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति शून्य दिखाई दे रही है। इसी गंभीर उदासीनता के विरोध में 1 मई, महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ द्वारा श्रृंखलाबद्ध उपोषण किया गया।
प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही
सर्वेक्षण हुआ, किंतु कार्रवाई शून्य! : अप्रैल 2024 में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कई कबाड़ व्यवसाय अवैध पाए गए, फिर भी नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
अधिकारी कहते हैं – “हमारे पास समय नहीं!” : समिति द्वारा लगातार प्रयास के बाद प्रांताधिकारी ने कहा, “हम पूरे वर्ष व्यस्त रहते हैं, आपकी मांग के अनुसार तुरंत कार्रवाई संभव नहीं”, जो गैर-जिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है।
कानून की जानकारी नहीं या टालमटोल? : नगर परिषद के मुख्याधिकारी ने कहा, “किस कानून के तहत कार्रवाई करें, आप हमें बताइए”, जबकि प्रदूषण नियंत्रण मंडल कर्मचारियों की कमी का पुराना कारण दे रहा है।
समिति ने प्रश्न उठाया कि, प्रशासन की इस ढिलाई से अवैध कबाड व्यवसायियों में “हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड सकता” जैसी मानसिकता बन गई है। क्या प्रशासन चिपळूण को ‘स्क्रैप सिटी’ बनाना चाहता है?
आगे आंदोलन की चेतावनी
पिछले 4 महीनों से जिलाधिकारी, प्रांताधिकारी और मुख्याधिकारी के पास बार-बार जाने के बावजूद केवल कागजी कार्रवाई ही हो रही है। इस रवैये से नाराज समिति ने स्पष्ट किया है कि अब केवल ज्ञापन नहीं दिए जाएंगे, अपितु कानूनी रास्ते अपनाकर अधिक तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
आज के उपोषण का आयोजन समिति के अनुराग उतेकर, राजेश ओतारी, अजिंक्य ओतारी, आदित्य जोशी, सभापति निहार कोवळे, डॉ. हेमंत चालके, विलास इंगवले, प्रशांत उतेकर, आशीष आठवले सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने किया।
इस उपोषण में नगर परिषद की उपनगराध्यक्षा सौ. रूपाली दांडेकर, भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष शशिकांत मोदी, विहिप के जिला मंत्री धनंजय चितळे, प्रमोद पटवर्धन, पराग ओक, व्यापारी उमेश काटकर, भाजपा जिला कोषाध्यक्ष आशीष खातू, अखिल विश्व गायत्री परिवार के उमेश महाडिक, गोवलकोट राजे प्रतिष्ठान के अभय जुवळे, गोरक्षक विक्रम जोशी, सनातन संस्था के महेंद्र चाळके, हनुमान प्रासादिक मंडल के पांढरी चव्हाण, वासुदेव शिंदे, उद्यमी अमित जोशी, दुर्गाप्रसाद मीरगल, निखिला प्रवीणचंद रतावा आदि सैकड़ों नागरिक शामिल हुए और प्रशासन की गैर-जिम्मेदाराना भूमिका का विरोध किया।
इस दौरान नगरसेवक शशिकांत मोदी ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को हल करने में पहल करेंगे। उपनगराध्यक्षा निखिला रतावा और निहार कोवळे ने भी कहा कि इस विषय पर मुख्याधिकारी से गंभीरता से फॉलो-अप किया जाएगा। वहीं नगराध्यक्ष उमेश सकपाळ ने आंदोलन स्थल पर आकर कहा कि वे इस संघर्ष में साथ हैं और कानूनी रूप से जो संभव होगा, वह करेंगे।
११ अप्रैल
चिपळूण (महाराष्ट्र) में अवैध कबाड व्यवसायों के विरुद्ध ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ द्वारा आंदोलन की चेतावनी

चिपळूण : भगवान परशुराम की पावन भूमि चिपळूण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में अवैध कबाड़ व्यवसायों की भारी बाढ़ आ गई है। निजी भूमि खरीदकर या किराए पर लेकर ये व्यवसायी रिहायशी इलाकों और चिपळूण-गोवा तथा चिपळूण-कराड राजमार्गों के किनारे खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं। इस संबंध में जिले के पालक मंत्री उदय सामंत से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने जिलाधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यहाँ के अनुविभागीय अधिकारी (प्रांताधिकारी) अशोक लिगाडे ने 15 दिनों का समय मांगा था, लेकिन हम उन्हें 20 दिनों की अवसर दे रहे हैं। यदि 27 अप्रैल 2026 तक इन अवैध व्यवसायों और संबंधित दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ की ओर से तीव्र जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा। साथ ही, पूरे राज्य में बढ़ती कबाड़ माफियाओं की समस्या के खिलाफ समस्त हिंदुत्ववादी संगठन एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे। यह चेतावनी यहाँ आयोजित एक पत्रकार परिषद में दी गई।

पत्रकार परिषद के मुख्य बिंदु
1. इन व्यवसायों में रासायनिक ड्रम धोना, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, लोहे के कबाड़ को काटना, औद्योगिक कचरे का प्रसंस्करण और प्लास्टिक एवं कार्डबोर्ड जैसी अत्यधिक ज्वलनशील वस्तुओं का भंडारण करना जैसे गंभीर एवं अवैध कार्य चल रहे हैं।
2. इन व्यवसायों की वैधता को लेकर चिपळूण नगर परिषद (24 दिसंबर 2025) और रत्नागिरी जिलाधिकारी (8 जनवरी 2026) के पास सबूतों के साथ बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। यह प्रशासनिक विफलता है ।
3. महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने स्पष्ट किया है कि ‘मे. अफजल स्क्रैप मर्चेंट’ के पास कोई अनुमति नहीं है। इसके उपरांत नगर परिषद प्रशासन अपना कचरा इसी अवैध व्यवसायी को क्यों बेच रहा है? जबकि परिषद के पास स्वयं के प्लांट और जगह उपलब्ध है।
4. सूचना के अधिकार (RTI) से पता चला है कि शहर के एक भी कबाड़ व्यवसायी का पंजीकरण नगर परिषद के रिकॉर्ड में नहीं है। ऐसे में नगर परिषद के मुख्य अधिकारी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से यह पूछना कि ‘किस कानून के तहत कार्रवाई करें’, हास्यास्पद है। अधिकारी केवल जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल रहे हैं।
5. 21 मार्च 2026 को नागावे ग्राम पंचायत क्षेत्र में एक प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट में भीषण आग लगी थी, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ। रिहायशी इलाकों और राजमार्गों पर स्थित ऐसे गोदाम नागरिकों के जीवन के लिए बड़ा खतरा हैं।
6. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कबाड़ इकट्ठा करने वाले फेरीवालों का कोई पंजीकरण नहीं है। वर्ष 2025-26 के दौरान BNSS की धारा 128 के तहत 28 प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां हुई हैं। ये बाहरी लोग भविष्य में बड़ी चोरी या अपराध कर सकते हैं, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है।








