
हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक राम नवमी के दिन, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसमें वे खुले तौर पर हिंदू आस्था और पूजा के प्रति अपनी नापसंदगी व्यक्त करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने पुन: एक बार कांग्रेस पार्टी की हिंदू-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।
“हिंदू धर्म और उसके रीति-रिवाज मुझे पसंद ही नहीं आए, मुझे वहां सिर्फ पत्थर दिखता है, खुदा नजर नहीं आता”
~ मणिशंकर अय्यरpic.twitter.com/dTsDWufpKn
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) March 25, 2026
वीडियो में अय्यर साफ तौर पर कहते हैं,
“मुझे कभी हिंदू धर्म और उसके रीति-रिवाज पसंद नहीं आए। इसलिए मुझे मस्जिद ले जाइए – मैं वहां खुशी से जाऊँगा। मेरी पत्नी इन परंपराओं में विश्वास करती हैं और मैं उनके साथ पूजा में बैठ जाता हूं। हमारे घर में पूजा-पाठ होता है और मैं उनके साथ बैठता हूं। लेकिन मुझे वहां केवल एक पत्थर दिखाई देता है। मुझे उसमें खुदा दिखाई नहीं आता।”
यह कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री (जिन्होंने मनमोहन सिंह सरकार में सेवा दी) और पार्टी की एक प्रमुख आवाज का सार्वजनिक बयान है, जिसमें वे स्वेच्छा से और खुले तौर पर यह कह रहे हैं कि हिंदू पूजा स्थलों से उन्हें कोई आध्यात्मिक भावना नहीं मिलती, जबकि मस्जिद जाने में उन्हें खुशी मिलती है।
मणिशंकर अय्यर को कांग्रेस का कोई अलग-थलग या असामान्य व्यक्ति मानकर नजरअंदाज करना आसान हो सकता है, किंतु उनका पिछला रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बताता है। यह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने,
- 2014 के चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी को तिरस्कारपूर्ण तरीके से “चायवाला” कहा था, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया लेकिन बाद में चुपचाप वापस ले लिया गया; उन्होंने पहले अटल बिहारी वाजपेयी को भी “नालायक” कहा था।
- 2015 में पाकिस्तान की यात्रा की और ISI प्रमुख के साथ भोजन किया, जिसके बाद उनके आलोचकों ने उन्हें “पाकिस्तानी मणिशंकर अय्यर” कहना शुरू कर दिया।
- उन्होंने कहा था कि, मोदी को सत्ता से हटाने के लिए पाकिस्तान की सहायता मांगी जिससे पाकिस्तान से बातचीत फिर शुरू सकें ।
- दिसंबर 2017 के गुजरात चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को “नीच किस्म का आदमी” कहा था।
- कांग्रेस पार्टी ने कभी भी हिंदू धर्म को लेकर अय्यर के विचारों का औपचारिक रूप से खंडन नहीं किया। मंदिरों और मूर्ति पूजा पर उनके विचार वर्षों से सार्वजनिक रहे हैं, और इस पर पार्टी की चुप्पी ही उसका जवाब रही है।
कांग्रेस का ‘सिलेक्टिव सेक्युलरिज्म´ फिर उजागर
अय्यर का बयान इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि इसमें स्पष्ट असंतुलन दिखाई देता है। वे यह नहीं कहते कि वे नास्तिक हैं और उन्हें कहीं भी भगवान नहीं दिखता। वे विशेष रूप से कहते हैं कि उन्हें मस्जिद में खुशी मिलती है जबकि मंदिरों में उन्हें केवल पत्थर दिखाई देते हैं।
यह सेक्युलरिज्म नहीं है। यह एक ऐसे व्यक्ति द्वारा हिंदू धार्मिक भावनाओं का लक्षित और स्पष्ट अस्वीकार है जिसने कांग्रेस पार्टी के साथ सत्ता के शीर्ष गलियारों में दशकों बिताए हैं।
कांग्रेस, जो स्वयं को संविधान की संरक्षक बताती है और सभी भारतीयों का समान प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, उसके एक वरिष्ठ नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से हिंदू पूजा को निरर्थक बताना और साथ ही इस्लामी पूजा स्थलों के प्रति सकारात्मक भाव दिखाना, यह ‘सिलेक्टिव सेक्युलरिज्म’ का स्पष्ट उदाहरण माना जा रहा है।








