विश्व महिला दिवस के अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति का उपक्रम !

मुंबई – विश्व महिला दिवस के अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से विलेपार्ले, नेरूल और ठाणे में महिलाओं के लिए ‘शौर्य प्रशिक्षण शिविर’ आयोजित किया गया। इस शिविर में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। समिति के प्रशिक्षकों ने उपस्थित महिलाओं का मार्गदर्शन किया। इस दौरान कराटे, लाठी-काठी और दंडसाखली के प्रात्यक्षिक दिखाकर सभी को सिखाया गया।
महिलाओं ने बताया कि “इस शिविर से हमें केवल जानकारी ही नहीं मिली, बल्कि समाज के प्रति हमारा दायित्व, हमारी सीमाएं, हमारी क्षमता, आवश्यक सावधानियां और जीवन में अपनाने योग्य आचरण जैसी अनेक महत्वपूर्ण बातें समझ में आईं।” बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस शिविर का लाभ लिया।
ठाणे

धर्मशिक्षा से अपने भीतर के दुर्गातत्त्व को जागृत करें ! – प्रशांत सुर्वे
प्रशिक्षण में सहभागी महिलाओं को मार्गदर्शन करते हुए कहा गया कि महिलाओं को राजमाता जिजाऊ, रानी लक्ष्मीबाई और रानी चेन्नम्मा के आदर्श सामने रखने चाहिए। स्वयं को कभी अबला न समझें। धर्मशिक्षा के माध्यम से अपने भीतर के दुर्गातत्त्व को जागृत करें और स्वसंरक्षण का प्रशिक्षण लेकर आने वाले संकटों का सामना करने के लिए सक्षम बनें।
नेरूल

शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर सक्षम बनें ! – सौ. प्रवीणा पाटील
उन्होंने कहा कि, हम गौरवशाली भारत में जन्मे हैं, जहां केवल स्त्री-पुरुष समानता ही नहीं, बल्कि स्त्री को ‘शक्ति स्वरूपिणी’ का स्थान दिया गया है। दुर्भाग्य से आज अनेक महिलाएं अपने भीतर की शक्ति को भूल गई हैं। इसका लाभ असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। इसे रोकने के लिए महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर सक्षम बनना आवश्यक है।
विलेपार्ले
स्वरक्षण के लिए स्वयं को तैयार करना ही समय की आवश्यकता ! – हेमंत पुजारे
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था हमेशा महिलाओं की सुरक्षा कर पाए, यह संभव नहीं है। समाज में चलते समय 24 घंटे कोई सुरक्षा के लिए साथ नहीं रह सकता। इसलिए स्वयं को स्वसंरक्षण के लिए तैयार करना ही आज की आवश्यकता है।
क्षणचित्र
कुछ प्रशिक्षणार्थियों ने कहा – “हम यह प्रशिक्षण सीखकर अन्य लोगों को भी सिखाने के लिए समय देंगे।”
नेरूल में सहभागी 3 लड़कियों ने स्वप्रेरणा से लाठी-काठी का प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किया।
प्रशिक्षणार्थियों के अभिप्राय
सौ. माधुरी बांदेकर – मेरी दो बेटियां हैं। इस शिविर के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर मेरी चिंता कम हुई है।
सौ. मधुमती देसाई – महिला दिवस के अवसर पर “मेरी बेटियों के लिए यह सबसे बड़ी भेंट थी”, ऐसा मुझे लगा।
कु. शिवानी अगीळेकर – हिन्दू युवतियों को घर से बाहर निकलते समय धर्मांध युवकों से सावधान रहना चाहिए।
कु. समृद्धी शेट्ये – इस शिविर के कारण मेरे मन में “देश के लिए कुछ करने का संकल्प” जागृत हुआ।
सौ. सोनाली शिवतरकर – इस शिविर का प्रशिक्षण पूरे हिन्दू समाज तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए मैं हर प्रकार का सहयोग करने के लिए तैयार हूं।








