हिंदू जनजागृति समिति के संघर्ष को मिली सफलता !

रायपुर (छत्तीसगढ): महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख समाचार पत्रों, ‘दैनिक भास्कर’ और ‘हरिभूमि’ में भगवान शिव और श्री गणेश जी का व्यावसायिक विज्ञापनों में अनुचित उपयोग करने वाली कंपनी ‘श्री गणेश ग्लोबल गुलाल प्राइवेट लिमिटेड’ के विरुद्ध हिंदू जनजागृति समिति द्वारा किए गए कड़े विरोध को बड़ी सफलता मिली है। समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट एवं छत्तीसगढ के समिति के श्री कमल बिस्वाल द्वारा इस अपमानजनक विज्ञापन के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई की मांग करने के बाद, कंपनी ने लिखित रूप में बिना शर्त क्षमा याचना की है।
Victory for Dharma 🚩
After strong protest by Hindu Janajagruti Samiti, Shri Ganesh Global Gulal Pvt Ltd has issued a written apology and agreed to withdraw the objectionable advertisement that hurt Hindu religious sentiments.
We welcome the quick corrective action taken by the… https://t.co/YtcZuE99jy pic.twitter.com/SV5KSQWRAC
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) February 15, 2026
विज्ञापन में क्या गलत था?
इस विज्ञापन में व्यावसायिक लाभ के लिए अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक चित्रण किया गया था:विज्ञापन में पूज्य श्री गणेश जी के हाथों में ‘गुलाल’ और ‘ठंडाई’ के पैकेट थमाए गए थे, जो देवताओं को मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने जैसा है। भगवान शिव के पावन पर्व ‘महाशिवरात्रि’ के अवसर पर भगवान श्री गणेश जी को ‘सेल्समैन’ (विक्रेता) की तरह दिखाकर उनके दिव्य स्वरूप का व्यवसायीकरण किया गया था। इसके अतिरिक्त, विज्ञापन में भगवान शिव और शिवलिंग के आसपास ‘कैप्टन अमेरिका’ जैसे विदेशी काल्पनिक पात्रों और अन्य उत्पादों का चित्रण करना हिंदू आस्था का घोर अपमान एवं उपहास था।
कंपनी ने स्वीकारी अपनी भूल !
विरोध के बाद कंपनी के निदेशक उमंग गोयल ने स्वीकार किया कि पूज्य श्री गणेश जी के हाथों में अपने ‘प्रोडक्ट’ को प्रदर्शित करना उनकी एक ‘बड़ी भूल और अनजानी गलती’ थी। कंपनी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना भूलवश हुई है और वे समस्त हिंदू सनातनी समाज से इसके लिए हृदय से क्षमा मांगते हैं। साथ ही, कंपनी ने भविष्य में ऐसी त्रुटि कभी न करने का वचन दिया है।
हिंदू जनजागृति समिति का स्पष्ट मत है कि हिंदू देवताओं का विज्ञापन के लिए उपयोग करना उनकी पवित्रता और दिव्यता का अनादर है। जिस प्रकार अन्य धर्मों के प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई जाती है, वैसी ही गंभीरता हिंदुओं की आस्था के प्रति भी होनी चाहिए। किसी भी कंपनी को अपनी वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए हमारे आराध्य देवों का अपमान करने का अधिकार नहीं है। समिति ने चेतावनी दी है कि ‘रचनात्मकता’ के नाम पर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानूनी संघर्ष और जनजागरण निरंतर जारी रहेगा।








