ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का ‘वंदे मातरम्’ पर वक्तव्य !
मातृभूमि का वंदन करने की अपेक्षा धर्म को प्राथमिकता देकर अपने प्राण देने को तैयार रहने वाले ऐसे मुसलमान क्या कभी देश के प्रति एकनिष्ठ होंगे ? – सम्पादक, हिन्दुजागृति

नई दिल्ली – केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गान अनिवार्य किए जाने के उपरांत मुसलमानों द्वारा उसका विरोध किया जा रहा है । ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने ‘वंदे मातरम्’ की सभी ६ कडियां गाने का विरोध किया है । उन्होंने कहा, “हम सिर कटवा सकते हैं; किंतु राष्ट्रीय गीत की उन (जिनमें ‘माता दुर्गा’ एवं ‘माता सरस्वती’ का उल्लेख है) विशेष पंक्तियों का गायन नहीं करेंगे ।”
‘वंदे मातरम्’ को वर्ष १९३७ से बताया विवादित !
समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने बताया कि,
१. ‘वंदे मातरम्’ वर्ष १९३७ से विवाद का विषय रहा है । वर्ष १९३७ में उस समय के प्रमुख नेता मौलाना अबुल कलाम आजाद एवं हुसैन अहमद मदनी ने कांग्रेस को पत्र लिखकर ‘वंदे मातरम्’ की कुछ पंक्तियां मुसलमान समुदाय की धार्मिक आस्था के विरुद्ध होने का उल्लेख किया था । इसके पश्चात कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित कर उन कुछ पंक्तियों को हटा दिया । (कांग्रेस की इसी मानसिकता के कारण भारत में कट्टरपंथी मुसलमान बढे तथा राष्ट्रविरोधी कृत्य करने लगे ! – संपादक)
२. वर्ष २०१६ में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय में यह उल्लेख किया गया था कि ‘वंदे मातरम्’ के पाठ के समय कोई खडा न हो, तो उसे देशद्रोही नहीं माना जाएगा ।’ (सुविधा अनुसार न्यायालय के निर्णय का उपयोग करने वाले मुसलमान ! श्रीराम जन्मभूमि प्रकरण का निर्णय मुसलमानों के विरुद्ध जाने पर उसे अस्वीकार करते हैं, इससे यह स्पष्ट होता है ! – संपादक)
३. राष्ट्रीय गीत की जिन पंक्तियों में देश को ‘माता दुर्गा’ एवं ‘माता सरस्वती’ कहा गया है, वे हमारी धार्मिक आस्था के विरुद्ध हैं ।(क्या ऐसे मुसलमान कभी सर्वधर्म समभाव का पालन करेंगे ? इससे ‘हिन्दू-मुसलमान भाई-भाई’ का दावा खोखला प्रमाणित होता है ! – संपादक) मुसलमान अपने प्राण दे सकते हैं; परंतु धार्मिक आस्था से समझौता नहीं कर सकते । यदि कोई हम पर ऐसा आदेश थोपने का प्रयास करेगा, तो उसे सहन नहीं किया जाएगा ।
‘ए.आई.एम.आई.एम.’ का भी विरोध
‘ए.आई.एम.आई.एम.’ (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन – अखिल भारतीय मुस्लिम एकता संघ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि मैं ‘वंदे मातरम्’ का आदर तथा सम्मान करता हूं; परंतु ‘इसे अनिवार्य बताया जाना’ असंवैधानिक है । भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह कहते हैं कि ‘यदि आप ‘वंदे मातरम्’ नहीं कहते, तो आप देशविरोधी हैं’, यह अनुचित है । हम राष्ट्रगान आनंदपूर्वक गाते हैं ।ऐसा करके अन्य सभी विषयों से ध्यान भटकाया जा रहा है ।








