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मंदिर के पैसे से होने वाली तमिलनाडु सरकार की परियोजना को मद्रास उच्च न्यायालय ने किया रद्द!

मंदिर का धन केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए ही व्यय किया जा सकता है ! – उच्च न्यायालय

चेन्नई (तमिलनाडु) – कल्लाझगर मंदिर की संचित एवं अतिरिक्त निधि का उपयोग व्यावसायिक सुविधाओं के लिए करने के तमिलनाडु की द्रमुक सरकार के निर्णय को मद्रास उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है । इस परियोजना के अंतर्गत उपहारगृह (रेस्टोरेंट), दुकान, सदनिका (फ्लैट) तथा अन्य व्यावसायिक सुविधाएं निर्मित करने का नियोजन किया गया था; परंतु न्यायालय ने इस निर्णय को वैधानिक रूप से अयोग्य बताते हुए निरस्त कर दिया । इस परियोजना के लिए मंदिर के ४० करोड रुपये व्यय किए जाने वाले थे ।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मंदिर अपनी निधि का उपयोग केवल धार्मिक प्रयोजनों के लिए ही कर सकता है एवं सरकार का यह निर्णय मंदिर की धार्मिक भावनाओं तथा संबंधित ‘तमिलनाडु हिन्दू धार्मिक एवं धर्मादाय अधिनियम’ का उल्लंघन करता है ।

तमिलनाडु हिन्दू धार्मिक एवं धर्मादाय विभाग ने मंदिर की कुछ भूमि को राज्य की संपत्ति समझकर उसकी निधि का आवंटन व्यावसायिक उपयोग के लिए कर दिया था । सरकार ने इस निधि का विशाल स्तर पर व्यय करने से पूर्व न्यासी मंडल (विश्वस्त मंडल) की स्वीकृति अथवा नियोजित अर्थ संकल्प प्रक्रिया का पालन नहीं किया था ।

संपादकीय भूमिका 

​इस निर्णय के पश्चात अब देशभर के सरकारीकरण हुए सभी मंदिरों का धन सरकार की योजनाओं के लिए नहीं, अपितु हिन्दू धर्म के लिए ही व्यय होना चाहिए, ऐसी मांग हिन्दुओं तथा उनके संगठनों को सभी सरकारों से करनी चाहिए !

सन्दर्भ : सनातन प्रभात

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