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हिन्दू विधिज्ञ परिषद की शिकायत के उपरांत कार्रवाई !
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शेष ब्योरा भी प्रस्तुत किए जाने की मिली जानकारी !
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क्या वक्फ बोर्ड सरकार का जमाई है ? – हिन्दू विधिज्ञ परिषद

मुंबई – हिन्दू विधिज्ञ परिषद की शिकायत के उपरांत महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने वर्ष २००२ से २०१८ तक के वार्षिक लेखापरीक्षण ब्योरे सरकार को प्रस्तुत किए हैं । हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने मार्च २०२५ में इस विषय में राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग से शिकायत की थी तथा उसके क्रियान्वयन की समीक्षा भी की थी । उसके उपरांत अल्पसंख्यक विकास विभाग ने वक्फ बोर्ड के लंबित लेखापरीक्षण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए । (केवल निर्देश देकर क्या होगा ! इसके लिए बोर्ड पर कार्रवाई करना भी आवश्यक है । मुसलमान समाज उनके हित के लिए बनाए गए इस बोर्ड की संदेहास्पद कार्यपद्धति के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग क्यों नहीं करता ? – संपादक)

१. प्रत्येक सरकारी विभाग अथवा निगम को प्रतिवर्ष सरकार को उसका लेखापरीक्षण ब्योरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है ।
२. वर्ष १९९५ में वक्फ कानून बना । तब से लेकर वक्फ बोर्ड को प्रतिवर्ष सरकार को लेखापरीक्षण ब्योरा प्रस्तुत करना अनिवार्य था; परंतु यह नहीं होने का हिन्दू विधिज्ञ परिषद को ध्यान में आने पर उसने इसकी शिकायत कर वक्फ बोर्ड की ढिली कार्यपद्धति से सरकार का ध्यान आकर्षित किया ।
३. उसके उपरांत वर्ष २००२ से २०१८ तक के लेखापरीक्षण ब्योरे सरकार को प्रस्तुत किए गए हैं, ऐसी जानकारी महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने अधिवक्ता इचलकरंजीकर को सूचना के अधिकार के अंतर्गत दी है ।
मंदिरों के ब्योरे जालस्थलों पर प्रकाशित होते हैं, जबकि वक्फ बोर्ड सरकार को वर्षाें तक ब्योरे ही प्रस्तुत नहीं करता ! – हिन्दू विधिज्ञ परिषद
एक ओर सरकारीकृति मंदिर उनके लेखापरीक्षण ब्योरे उनके जालस्थल पर सभी के लिए प्रकाशित करते हैं, उदाहरणार्थ प्रभादेवी (मुंबई) का श्री सिद्धिविनायक मंदिर, कोल्हापुर की ३ सहस्र से अधिक मंदिरों का प्रबंधन देखनेवाली पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान व्यवस्थापन समिति; तो दूसरी अेर वक्फ बोर्ड राज्य सरकार को ब्योरा भी नहीं देता । इससे मुसलमान समाज को अथवा जनता को वक्फ बोर्ड का काम समझ में आना तो दूर ही रहा । इससे क्या वक्फ बोर्ड सरकार का जमाई है ?, यह प्रश्न उठता है ।
संपादकीय भूमिका
२० वर्ष के लंबे समय के उपरांत लेखापरीक्षण ब्योरा प्रस्तुत करना, इसे क्या कहा जाए ? इससे ‘महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड भ्रष्टाचार में आकंड डूब गया है ’, ऐसा किसी ने कहा, तो क्या तार्किकदृष्टि से उसका प्रतिवाद करना संभव है ?
सन्दर्भ : सनातन प्रभात








